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Mahakumbh : अखाड़ा परिषद ने कहा- महाकुंभ में सिर्फ सनातनी अफसरों की हो तैनाती, सीएम योगी के समक्ष उठेगा मुद्दा

Fri, 04 Oct 2024 04:56 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

महाकुंभ की तैयारियों के संबंध में छह अक्तूबर को मुख्यमंत्री के साथ संतों की बैठक होनी है। इसके लिए मेला प्रशासन ने सभी अखाड़ों के प्रतिनिधियों को बुलावा भेजा है। इसके बाद अखाड़ों में आम सहमति से मुख्यमंत्री के समक्ष ज्वलंत मुद्दे रखने की कवायद शुरू हो गई है।
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कुंभ मेला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने महाकुंभ में सिर्फ सनातनी अफसरों को ही तैनात करने की मांग उठाई है। सनातनियों के अलावा दूसरे व्यक्तियों को मेला क्षेत्र में प्रवेश न देने और उनके स्नान की दूसरी जगह व्यवस्था कराने की भी मांग उठाई जा रही है। इस मुद्दे को छह अक्तूबर को यहां आ रहे सीएम योगी आदित्यनाथ के समक्ष उठाया जाएगा। शुक्रवार को अखाड़ा परिषद की बुलाई गई बैठक में पेशवाई और शाही नामों को बदलने पर भी आपसी सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी।

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महाकुंभ की तैयारियों के संबंध में छह अक्तूबर को मुख्यमंत्री के साथ संतों की बैठक होनी है। इसके लिए मेला प्रशासन ने सभी अखाड़ों के प्रतिनिधियों को बुलावा भेजा है। इसके बाद अखाड़ों में आम सहमति से मुख्यमंत्री के समक्ष ज्वलंत मुद्दे रखने की कवायद शुरू हो गई है। बृहस्पतिवार को कुछ अखाड़ों की बैठक में संतों ने महाकुंभ की सुरक्षा व्यवस्था चाक-चाैबंद करने को अहम बताया।

अखाड़ा परिषद के महामंत्री और जूना अखाड़े के संरक्षक महंत हरि गिरि के मुताबिक, संतों ने महाकुंभ में सिर्फ सनातनी अफसरों और कर्मियों की ही ड्यूटी लगाने की मांग रखी है। मेले में जो भी श्रद्धालु आएं, उनके भी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के जरिये पहचान की जाए। संतों ने महाकुंभ मेले में सिर्फ सनातनियों को ही प्रवेश देने पर भी चर्चा की है। इस प्रस्ताव को शुक्रवार को होने जा रही सभी अखाड़ों की बैठक में विस्तार से रखा जाएगा। सभी की सहमति के बाद मुख्यमंत्री के समक्ष यह मांग उठाएंगे।

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शाही और पेशवाई शब्दों का भी उठेगा मामला

महाकुंभ में पेशवाई और शाही शब्दों के नाम बदलने पर भी रायशुमारी की जाएगी। अखाड़ा परिषद इस पर भी बैठक में विचार करके सहमति बनाने की कोशिश करेगा। इसके बाद यह मुद्दा भी सीएम के समक्ष रखा जाएगा। माना जा रहा है कि मुगलकाल से चले आ रहे इन दोनों शब्दों की विदाई हो जाएगी।

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि मेला क्षेत्र से पानी नहीं उतरने पर अखाड़ों को उस पार (झूंसी की ओर) जाने के लिए भी तैयार रहना होगा। सीएम के साथ होने वाली बैठक में अखाड़ा परिषद इसका भी सुझाव रखेगा। साथ ही आवश्यक तैयारियां कराने का अनुरोध भी किया जाएगा। शुक्रवार की अखाड़ा परिषद की बैठक में सीएम से होने वाली चर्चा से जुड़े सभी बिंदुओं को अंतिम रूप दिया जाएगा।

सरकारी विभागों में तालमेल की कमी पर संतों ने जताई नाराजगी

महाकुंभ के कार्यों को लेकर विभागों में तालमेल की कमी पर संतों ने नाराजगी जताई है। यह मुद्दा भी मुख्यमंत्री के समक्ष प्रमुखता से रखने की बात कही है। अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि ने कहा कि कुंभ के कार्यों में लेटलतीफी की वजह आपसी तालमेल का घोर अभाव है।


बृहस्पतिवार को अखाड़ा परिषद की बैठक में संतों ने कहा कि एकबार बनने के बाद उसी सड़क को दोबारा खोदा जा रहा है। इससे आमजन त्रस्त हैं। इस बारे में मुख्यमंत्री से अनुरोध किया जाएगा कि अधिकारियों को सख्त निर्देशित दें, ताकि महाकुंभ के काम समय से हो सकें। गंगा की स्वच्छता, पर्यावरण सहित अन्य मुद्दों को भी संतों की ओर से सीएम के समक्ष उठाया जाएगा।

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अखाड़ों में मतभेद नहीं, परिषद का चुनाव मेरा व्यक्तिगत मत : महंत यमुना गिरि

महाकुंभ से पहले अखाड़ा परिषद का चुनाव कराने की मांग उठाने वाले महंत यमुना गिरि ने कहा कि अखाड़ों में कोई मतभेद नहीं है। महाकुंभ को भव्य और दिव्य बनाने के लिए सभी अखाड़े एकमत हैं। सरकार से मांग की जाएगी की संतों और श्रद्धालुओं को महाकुंभ में बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद का चुनाव कराने संबंधी बयान मेरा व्यक्तिगत मत था। इसमें मतभेद जैसी कोई बात नहीं है।

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