महाकुंभ मेला महंत राजेंद्र दास की ही देखरेख में होगा। इनके नेतृत्व में ही महाकुंभ की बैठकों का निष्पादन और अन्य कार्य होंगे। मैं इनका पूर्ण समर्थन करता हूं और पूर्व में दिए गए समर्थन पत्र को निरस्त कर चुका हूं।
दिनेंद्र दास ने अमर उजाला को फोन पर बताया कि हनुमान गढ़ी के एक मेरे विश्वासपात्र बुजुर्ग संत को लेकर कुछ लोग मेरे पास आए थे और रवींद्र पुरी (निरंजनी) के समर्थन में पत्र लिखवा लिया था। बाद में जब पता चला तब मैंने उसे निरस्त कर दिया।
उधर, दिनेंद्र दास के समर्थन के बाद महंत राजेंद्र दास ने कहा कि निरंजनी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी के नेतृत्व वाली अखाड़ा परिषद को फर्जी बताया। राजेंद्र दास का कहना है कि महंत रवींद्र पुरी (मनसा देवी मंदिर) व महंत हरि गिरि (जून अखाड़ा) जिसे अखाड़ा परिषद बता रहे हैं वह वास्तव में संन्यासी परिषद है।
नौ अखाड़े मेरे साथ : महंत रवींद्र पुरी
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने महंत राजेंद्र दास के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। महंत रवींद्र पुरी का कहना है कि तेरह में से नौ अखाड़े उनके साथ हैं। अध्यक्ष वही होगा, जिसके साथ अखाड़े होंगे।
उन्होंने बताया कि पांच संन्यासी अखाड़े, दो उदासी , एक बैरागी और एक निर्मल अखाड़ा को मिलाकर कुल नौ अखाड़े उनके साथ हैं। ऐसे में राजेंद्र दास को अनर्गल बयानबाजी से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले रामजन्म भूमि ट्रस्ट के सदस्य दिनेंद्र दास ने उन्हें निर्मोही अखाड़े का भी समर्थन दिया था। लेकिन, अब अगर वह राजेंद्र दास को महाकुंभ के लिए नामित कर रहे हैं, तो इस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। महाकुंभ के लिए किसी न किसी सदस्य को नामित करने प्रत्येक अखाड़े का अंदरूनी मामला है।
संन्यासी, उदासी और बैरागी तीनों अखाड़े मेरे साथ हैं। अखाड़ा परिषद जिसे बताया जा रहा है, उसके प्रमुख दोनों पदों पर क्रमश: महंत रवींद्र पुरी और महंत हरि गिरि संन्यासी है, इसलिए वह अखाड़ा परिषद नहीं, संन्यासी परिषद है। उसे संन्यासी परिषद ही माना जाएगा। - महंत राजेंद्र दास