महिलाओं की शिक्षा के खिलाफ नहीं थे अकबर
प्रयागराज। अलीगढ़ मुस्लिम विवि के उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. सिराज अजमली ने कहा है कि अकबर अंग्रेज़ों की यलगार को पसंद नहीं करते थे और उस पर शायरी के ज़रिए अपना रद्द अमल करते रहते थे। लोकायत प्रकाशन और ‘क’ कला दीर्घा की ओर से डॉ.ताहिरा परवीन की किताब ‘गांधीनामा: अकबर के बहाने गांधी के तकाज़े’ के संदर्भ में ‘अकबर इलाहाबादी के सौ साल और गांधीनामा पढ़ते हुए’ विषय पर आनलाइन गोष्ठी के तहत उन्होंने कहा, अकबर चाहते थे कि कोई हिंदुस्तानी ऐसा हो जो अंग्रेजों से टक्कर ले, इसलिए गांधी जी उन्हें पसंद आते थे।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो.सदानंद शाही ने कहा, अकबर इलाहाबादी ठेठ देशज प्रतिभा के व्यक्ति थे। जिस समय अंग्रेजी शिक्षा और अंग्रेजी फैशन परस्ती आम थी, अकबर अपनी सहज बुद्धि से उसका आलोचनात्मक पाठ प्रस्तुत कर रहे थे। प्रो.संतोष भदौरिया ने अकबर की स्मृति यात्रा 1857 से शुरू होकर गांधी के असहयोग आंदोलन तक है। दिल्ली विवि के उर्दू विभाग के प्रो.अबूबकर अब्बाद ने कहा, वह औरतों की तालीम के खिलाफ नहीं थे।
प्रो.हेरंब चतुर्वेदी ने कहा, सौ बरसों बाद भी अकबर की प्रासंगिकता में कोई कमी नहीं आई है, आज भी उनके गज़लें पढ़ी और सराही जा रही हैं। इविवि के उर्दू विभाग की अध्यक्ष प्रो.शबनम हमीद बोलीं, अकबर के समय में दो तहज़ीबों का आपस में खासा टकराव था। उन्होंने हास्य व्यंग्य की शायरी के सहारे सलीके से अपनी बात कही। संयोजिका डॉ.ताहिरा परवीन ने वक्ताओं का स्वागत करते हुए उनका शुक्रिया अदा किया। संचालन विश्वमौली ने किया। कार्यक्रम में डॉ. शाइस्ता अंजुम, सुधा शर्मा लंदन से मजाज़ एकेडेमी अध्यक्ष, डॉ. धीरेंद्र, डॉ. लक्ष्मन प्रसाद गुप्ता आदि शामिल थे।