इसी पिस्टल से अतीक और अशरफ को मारी गई थी गोली।
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फायरिंग बंद होने पर भी आंखों के सामने घूमता रहा मंजर
पंकज बताते हैं कि घटना के बाद कुछ समझ ही नहीं आया। फायरिंग बंद होने के बाद भी काफी देर तक आंखों के सामने वही दृश्य घूमता रहा। काफी देर तक सिर पकड़कर वहीं बैठा रहा। काफी देर बाद स्थिति सामान्य हो सकी।
न्यायिक आयोग ने नौ महीने तक की जांच, सैकड़ों गवाहों के दर्ज किए बयान
अतीक और उसके भाई अशरफ की हत्या की जांच कर रहे न्यायिक आयोग ने नौ महीने तक पड़ताल की। 18 जनवरी को जांच रिपोर्ट कैबिनेट में पेश कर दी गई थी। फिलहाल, इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है। आयोग ने जांच में हर बिंदु पर बेहद बारीकी से तफ्तीश की। हत्याकांड के चश्मदीदों समेत सैकड़ों गवाहों के बयान दर्ज किए। आयोग के सदस्य कई बार प्रयागराज आए और घटनास्थल समेत हत्याकांड से संबंधित स्थलों के चप्पे-चप्पे की जांच की।
माफिया अतीक अहमद और अशरफ। फाइल फोटो
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हत्या के दो दिन बाद गठन
शासन ने 17 अप्रैल को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार त्रिपाठी की अध्यक्षता में जांच के लिए तीन सदस्यीय आयोग बनाया था। इसमें पूर्व डीजी इंटेलिजेंस सुबेश कुमार सिंह और पूर्व जिला न्यायाधीश बृजेश कुमार सोनी भी शामिल थे। आयोग ने जांच शुरू कर दी थी। हालांकि, सात मई को आयोग में इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायमूर्ति दिलीप बाबा साहब भोंसले और झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह को भी शामिल किया। न्यायमूर्ति भोंसले को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। इस तरह सदस्यों की संख्या पांच हो गई।
सीन रिक्रिएट कर जाना था, क्या हुआ था उस दिन
आयोग के सदस्यों ने घटनास्थल पर सीन रीक्रिएट भी किया था। साथ ही विवेचना करने वाली एसआईटी के सदस्यों से भी पूछताछ की थी। जांच में सामने आए तथ्यों को कई बार परखा भी गया। कई बयानों को क्राॅस चेक भी किया गया। जिस होटल में कातिल ठहरे थे, वहां के स्टाफ से भी पूछताछ की गई। नौ महीने तक लंबी जांच, पूछताछ और बयानों को परखने के बाद आयोग ने जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी थी।