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मुस्लिम मतों के बंटवारे में एआईएमआईएम भी हिस्सेदार

Thu, 12 Nov 2020 01:21 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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असदुद्दीन ओवैसी - फोटो : social media
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बिहार चुनाव में समाजवादी पार्टी की सीधी भागीदारी तो नहीं रही लेकिन नतीजों ने उसकी चुनौती जरूर बढ़ा दी है। खासतौर पर, एआईएमआईएम की बढ़ती ताकत को देखते हुए मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण की दावेदारी में जुटी सपा के साथ कांग्रेस की मुश्किलें भी बढ़ती दिख रही हैं। 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में असउदुद्दीन ओवैसी की इस पार्टी को भी मुस्लिम मतों के हिस्सेदार के रूप में देखा जाने लगा है। उत्तर प्रदेश में होने वाले पंचायत और आगामी विधानसभा चुनाव में जिले की सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारने की घोषणा करके पार्टी ने इसके संकेत भी दे दिए हैं।

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बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी ने पांच सीटों पर जीत हासिल की है। प्रदेश की राजनीति में इस जीत का महत्व इससे ही समझा जा सकता है कि सपा के स्थानीय नेताओं की ओर से दी गई पहली प्रतिक्रिया में ओवैसी की भूमिका पर ही सवाल उठाए गए। महानगर प्रवक्ता सै.मो.अस्करी ने एआईएमआईएम को भाजपा की बी पार्टी करार दिया।

असदुद्दीन ओवैसी - फोटो : ANI
जिले में मुस्लिम मतदाताओं की बात करें तो शहर दक्षिणी, पश्चिमी, फूलपुर और प्रतापपुर में इनकी निर्णायक संख्या है। इन विधानसभा क्षेत्रों में करीब एक लाख मुस्लिम मतदाता हैं। शहर उत्तरी में सबसे कम करीब 20 हजार मुस्लिम मतदाता हैं। जिले की अन्य विधानसभा सीट में भी इनकी प्रभावी संख्या है। इन्हें सपा का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है। हालांकि प्रियंका गांधी की अगुवाई में कांग्रेस प्रदेश की राजनीति में आक्रामक तरीके से सामने आई है। दोनों दलों की मुस्लिम मतों पर नजर है और उनमें भाजपा का विकल्प बनने की होड़ भी है। ऐसे में एआईएमआईआई के मजबूत होने मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण की चुनौती और बढ़ गई है।
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असदुद्दीन ओवैसी - फोटो : एएनआई
प्रयागराज में एआईएमआईएम की सियासी मौजूदगी को तो देखें तो उसके खाते में पार्षदी की एक सीट ही आई। इससे पहले 2017 में पार्टी ने शहर दक्षिणी से प्रत्याशी उतारा था। उस चुनाव में पार्टी मजबूत उपस्थिति नहीं दर्ज कराई पाई लेकिन आगे सभी चुनाव में बड़ी भागीदारी की रणनीति बनाई गई है। पूर्व महानगर अध्यक्ष अफसर महमूद का कहना है कि पार्टी इस बार पंचायत चुनाव में भी प्रत्याशी उतारेगी।

इसके अलावा नगर निकाय चुनाव में पार्टी की ओर से पार्षदी के साथ महापौर के लिए भी उम्मीदवार उतारे जाने की रणनीति बनाई गई है। अफसर का कहना है कि यदि किसी दल से गठबंधन नहीं हुआ तो विधानसभा चुनाव में यहां की सभी 12 सीटों पर उम्मीदवार उतारा जाएगा। इसकी तैयारी के साथ प्रत्याशी की तलाश भी शुरू कर दी गई है।

एआईएआईएम के इस रुख को देखते हुए आगामी विधानसभा चुनाव में सपा तथा अन्य दलों के लिए मुस्लिम मतों के बिखराव को रोकने की चुनौती होगी। हालांकि, सपा के एक वरिष्ठ नेता का अब भी कहना है कि बिहार और उत्तर प्रदेश की परिस्थितियां अलग-अलग हैं। बिहार में कोई बड़ा मुस्लिम नेता नहीं है। इसलिए वहां लोगों ने एआईएमआईएम की तरफ देखा। यहां परिस्थितियां अलग है। उनका दावा है कि मुलायम सिंह यादव को छोड़कर यहां मुस्लिम मतदाता कहीं और नहीं जाएंगे।
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