2018 में एक ने एनएससी के लिए पैसा दिया, लेकिन निखिल ने किसान विकास पत्र बनवा दिया। इसकी शिकायत हुई तो एजेंसी रद्द कर दी गई। उसकी डाक विभाग के अफसरों में अच्छी पैठ थी। इसलिए मामला तूल नहीं पकड़ा। उसी दाैरान उसने बहन नीति के नाम एजेंसी ले ली और खुद काम करता रहा। लोगों का भरोसा बना रहे, इसलिए वह नियमित ब्याज और रिटर्न देता रहा।
उसके भरोसे पर शिव बाबू चौरसिया ने 59 लाख रुपये, बलराम यादव ने 16 लाख रुपये, कृष्णा महेंद्रू ने 7.5 लाख रुपये समेत करीब 40 लोगों ने लाखों रुपये निवेश किए थे। कुछ महीने पहले वह बीमार हुआ तो रिटर्न देना बंद कर दिया। लोग डाकघर पहुंचे तो वहां पर उनका रिकॉर्ड ही नहीं था। इसी बीच अप्रैल 2024 में उसका भी निधन हो गया। अब उनकी बहन लोगों को जवाब नहीं दे पा रही हैं। इसलिए शिकायत डाक निदेशक तक पहुंची।
माैत से दो दिन पहले बताया कि गबन किया
कई वर्ष पहले कृष्णा महेंद्रू ने 7.5 लाख रुपये मंथली इनकम स्कीम (एमआईएस) योजना के तहत निखिल को दिया था। निखिल उनको हर महीने ब्याज देते रहे। पिछले कुछ महीने से ब्याज देना बंद किया तो वह डाकघर गई। वहां बताया गया कि उनके नाम अकाउंट भी नहीं है। वह निखिल के घर के पास ही रहती हैं और उसे अपने बेटे जैसे मानती थीं। वह उसके घर गईं और पासबुक मांगा तो वह टालता रहा। निधन से दो पहले वह फिर से घर गईं तो उसने कबूला कि फ्रॉड किया है।
इस मामले शिकायत दारागंज के कई लोगों ने की है। इसकी जांच के लिए सात अधिकारियों को लगाया गया है। अब तक की जांच से पता चला है कि वह डाक विभाग की योजनाओं के नाम पर लोगों से पैसे लेकर खुद रखता और फर्जी पासबुक बनाता था। ऐसे ग्राहकों का रिकॉर्ड डाकघर में नहीं है। उसके इस खेल में विभाग के जिन लोगों की मिलीभगत होगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।- गाैरव श्रीवास्तव, डाक निदेशक