फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बारगाह में सजदे के बाद बांटी खुशियां

Wed, 14 Sep 2016 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
विज्ञापन
क्राइम
विज्ञापन
इलाहाबाद। कुर्बानी का त्योहार ईद-उल-अजहा मंगलवार को संजीदगी और पाकीजगी के साथ मनाया गया। शहर के तमाम रास्ते इबादतगाहों की ओर मुड़े। ईदगाह, जामा मस्जिद चौक, शिया जामा मस्जिद चक सहित शहर की तमाम मस्जिदों में बकरीद की खास नमाज अदा की गई। नमाज के बाद लोगों ने गले मिलकर एक दूसरे को मुबारकबाद दी। गोश्त के साथ सेवइयां भी पकाई गईं।
विज्ञापन

घर लौटकर अल्लाह की राह में जानवरों की कुर्बानी कराई गई। रवायत के मुताबिक गोश्त को तीन हिस्सों में करके पहला हिस्सा गरीबों, यतीमों, दूसरा हिस्सा अपने रिश्तेदारों, अजीजों में बांटा गया। वहीं बचे हुए तीसरे हिस्सा खुद के इस्तेमाल में लाया गया। वहीं बड़े जानवरों की कुर्बानी अटाला स्थित स्लाटर हाउस में कराई गई। जानवरों की खाल पर जरूरतमंदों का हक रहा। इसलिए उसे मदरसों और जरूरतमंदों के हक में दे दिया गया।
 बकरीद पर दी मुबारकबाद
बकरीद पर मुबारकबाद देने का सिलसिला इबादतगाहों से नमाज के बाद शुरू हुआ और देर रात तक जारी रहा। लोगों ने करीबियों, दोस्तों को मुबारकबाद दी। व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर आदि भी मुबारकबाद दी गई।  लोगों ने एक दूसरे के घर जाकर गोश्त और सेवइयां चखीं और मुबारकबाद दी। लोगों को अपने गैर मुस्लिम दोस्तों का सबसे ज्यादा इंतजार रहा। मुस्लिम इलाकों मे देर रात तक चहल  पहल रही।
विज्ञापन

 कहीं बेहतर इंतजाम, कहीं रहीं दिक्कतें
इलाहाबाद। त्योहार पर बिजली, पानी, साफ-सफाई और सुरक्षा की व्यवस्था मुकम्मल रही। हालांकि कई हिस्सों में शिकायतें भी मिलीं। अब्दुल सलाम ने आरोप लगाया कि नगर आयुक्त से शिकायत के बावजूद अकबरपुर, करेली, निहालपुर, लकड़मंडी आदि इलाकों में साफ-सफाई नहीं कराई गई।
 जुमेरात तक रहेगा कुर्बानी का सिलसिला
कुर्बानी का सिलसिला अगले दो दिनों यानी जुमेरात तक जारी रहेगा। इसके मद्द्नजर हटिया, चौक, नखासकोहना, रसूलपुर, दरियाबाद, करेली आदि के बकरा बाजारों में खरीद-फरोख्त का दौर जारी रहा। हालांकि बचे हुए बकरों की कीमतें कम हुईं।
 चिकवों की खूब रही चांदी
बकरीद पर बकरों की कुर्बानी कराने के लिए चिकवों की चांदी रही। हालांकि सबने पहले से ही चिकवों की बुकिंग कर रखी थी लेकिन ज्यादा मांग होने के कारण कई जगहों पर तो चिकवे सिर्फ कुर्बानी कराकर की चले गए। गोश्त को टुकड़ों में करने के लिए दोबारा आए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें