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पितृ पक्ष के बाद जगदंबा के कलश स्थापन के लिए इस बार महीने भर का इंतजार

Mon, 31 Aug 2020 11:52 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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इस बार पितृपक्ष के बाद जगत जननी जगदंबा के आवाहन और कलश स्थापना के लिए महीने भर का इंतजार करना होगा। अरसा बाद पितृपक्ष के बाद नवरात्रि की शुरुआत नहीं होगी। अलबत्ता अधिमास लग जाएगा। अधिमास में मांगलिक कार्य तो वर्जित रहेंगे, लेकिन महीने भर सनातन धर्मी संगम स्नान के साथ ही गंगा-यमुना के तटों पर श्रीहरि की आराधना करेंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पितृपक्ष के बाद अधिमास का यह संयोग 165 वर्ष बाद आएगा।

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prayagraj news - फोटो : prayagraj
पंचांग के अनुसार इस साल पितृपक्ष के श्राद्ध दो सितंबर से आरंभ होंगे। 17 सितंबर को पितृपक्ष पूरा होगा। पितृपक्ष के दूसरे दिन की प्रतिपदा से ही नवरात्रि आरंभ हो जाता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। पितृपक्ष के अगले दिन अधिकमास शुरू हो जाएगा। अधिक मास 16 अक्तूबर तक चलेगा। इसके बाद 17 अक्तूबर से मां दुर्गा की नौ दिवसीय आराधना का नवरात्रि व्रत शुरू होगा।

prayagraj news - फोटो : prayagraj
इस साल आश्विन माह के साथ ही अधिकमास लग रहा है। ऐसे में दो आश्विन मास होंगे। आश्विन मास में श्राद्ध और नवरात्रि के बाद दशहरा होगा। अधिकमास लगने के कारण इस बार दशहरा 26 अक्टूबर को दीपावली भी काफी बाद में 14 नवंबर को मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्र के मुताबिक अधिकमास को कुछ इलाकों में मलमास भी कहते हैं। इसकी वजह यह है कि इस पूरे महीने में शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं। इस माह में सूर्य संक्रांति न होने के कारण यह महीना मलिन माना है। इस वजह से लोग इसे मलमास भी कहते हैं। मलमास में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे कोई भी शुभ कार्य स्थगित रहेंगे।
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prayagraj news - फोटो : prayagraj

भगवान ने खुद दिया है पुरुषोत्तम मास नाम

पौराणिक मान्यता के अनुसार मलिनमास होने के कारण कोई भी देवता इस माह में अपनी पूजा नहीं करवाना चाहते थे। कोई भी इस माह के देवता नहीं बनना चाहते थे। तब मलमास ने श्रीहरि से खुद को स्वीकार करने का निवेदन किया। तब श्रीहरि ने इस महीने को अपना नाम दिया पुरुषोत्तम। तभी से मलमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस महीने में भागवत कथा सुनने, प्रात: स्नान के बाद पूजा, दान, पुण्य करने से मोक्ष के द्वार खुलते हैं।
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