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Prayagraj : पुलिसिया धमकी पर हाईकोर्ट की सख्ती के बाद एसओ व दो कांस्टेबल पर केस, निलंबित

Sun, 13 Jul 2025 11:55 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिकाकर्ता और उसके अधिवक्ता को डराने धमकाने की पुलिसिया कार्रवाई पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट के आदेश पर एसपी जाैनपुर ने भी मामले की जांच में थाना प्रभारी मुंगरा बादशाहपुर और सिपाहियों को प्रथमदृष्टया दोषी पाया था।
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अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिकाकर्ता और उसके अधिवक्ता को डराने धमकाने की पुलिसिया कार्रवाई पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट के आदेश पर एसपी जाैनपुर ने भी मामले की जांच में थाना प्रभारी मुंगरा बादशाहपुर और सिपाहियों को प्रथमदृष्टया दोषी पाया था। इसके बाद उनके खिलाफ केस दर्ज कर निलंबन की कार्रवाई की। कोर्ट में सुनवाई के दाैरान एसपी की ओर से कार्रवाई के संबंध में जानकारी दी गई। दूसरी ओर मामले में अब वकील ने स्वयं को खतरा बताते हुए हलफनामा दाखिल कर सुरक्षा मांगी है।

बुजुर्ग (90 वर्षीय) याची गाैरी शंकर सरोज की याचिका पर न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की अदालत ने सुनवाई की। याचिका में बड़ागांव में हो रहे पुलिस और लेखपाल के अत्याचार को उजागर किया गया था। इसके जवाब में पुलिस ने न केवल उन्हें धमकाया, बल्कि उनके पोते को अवैध रूप से हिरासत में लेकर दो हजार रुपये की रिश्वत लेकर छोड़ा। अदालत के आदेश पर एसपी जौनपुर ने जांच की और माना कि पुलिसकर्मियों का आचरण अवैध था।

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उन्होंने बताया कि मामले में आरोपी कांस्टेबल पंकज मौर्य, नितेश गौड़ और थाना प्रभारी मुंगरा बादशाहपुर को निलंबित कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और एससी/एसटी एक्ट में एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं, याची के अधिवक्ता विष्णुकांत तिवारी ने कोर्ट को बताया कि नौ जुलाई की रात पुलिस उनके घर पहुंची, उनके पिता से पूछताछ की गई और रात में गिरफ्तारी जैसा माहौल बनाया गया। ट्रूकालर पर एसएचओ मुंगरा के नाम से कॉल करने वाले अधिकारी ने उन्हें थाने बुलाने की कोशिश की। वकील ने इस संबंध में कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर सुरक्षा की गुहार लगाई।

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हाईकोर्ट का आदेश ...बिना अनुमति न कॉल, न गिरफ्तारी

वकील की शिकायत पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस अब न वकील से संपर्क करेगी, न उन्हें गिरफ्तार करेगी, न उनके घर आएगी। अगर उनसे बातचीत करनी है तो इस न्यायालय से पूर्व अनुमति जरूरी होगी।

अपर मुख्य सचिव (गृह) को भी बनाया जाएगा पक्षकार

अदालत ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ पुलिस का मामला नहीं है, बल्कि राज्य सरकार की जवाबदेही भी है। इसलिए अपर मुख्य सचिव (गृह) को याचिका में प्रतिवादी बनाया जाएगा। उन्हें और एसपी जौनपुर को 15 जुलाई तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

कोर्ट ने की टिप्पणी

अगर वकील को ही डराया जाएगा तो न्यायपालिका की स्वतंत्रता खतरे में पड़ जाएगी। यह आपराधिक अवमानना का मामला है : हाईकोर्ट

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