हाईकोर्ट का आदेश ...बिना अनुमति न कॉल, न गिरफ्तारी
वकील की शिकायत पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस अब न वकील से संपर्क करेगी, न उन्हें गिरफ्तार करेगी, न उनके घर आएगी। अगर उनसे बातचीत करनी है तो इस न्यायालय से पूर्व अनुमति जरूरी होगी।
अपर मुख्य सचिव (गृह) को भी बनाया जाएगा पक्षकार
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ पुलिस का मामला नहीं है, बल्कि राज्य सरकार की जवाबदेही भी है। इसलिए अपर मुख्य सचिव (गृह) को याचिका में प्रतिवादी बनाया जाएगा। उन्हें और एसपी जौनपुर को 15 जुलाई तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
कोर्ट ने की टिप्पणी
अगर वकील को ही डराया जाएगा तो न्यायपालिका की स्वतंत्रता खतरे में पड़ जाएगी। यह आपराधिक अवमानना का मामला है : हाईकोर्ट