आरोप लगाया कि बहू का गांव के प्रधान और बडीसी से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इन्होंने मिलकर बेटे को मारपीट कर जहर दिया है। कोर्ट के आदेश पर दर्ज मुकदमे की विवेचना के बाद पुलिस ने बहू पूजा, प्रधान वीरेंद्र श्रीवास्तव और बीडीसी अनुज प्रताप सिंह के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
ट्रायल के दौरान प्रधान की 2016 में मौत हो गई। उसके खिलाफ मुकदमा उपशमित कर दिया गया, जबकि पूजा और अनुज के खिलाफ अभियोजन ने छह गवाह पेश किए, लेकिन मामला सिद्ध नहीं हो सका। 16 साल से पति की हत्या का आरोप झेल रही पूजा बेगुनाह साबित हुई।
बड़े बेटे ने मुकदमा दर्ज कराने की अर्जी तैयार कराई थी
16 साल पहले छोटी बहू पूजा के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करवाने वाली सास ने अदालत में कहा...बड़े बेटे स्वयंभव ने मुकदमा दर्ज कराने की अर्जी तैयार कराई थी। मैंने तो केवल अंगूठा लगाया। जिस रात बेटे की तबीयत बिगड़ी बहू ने ही जानकारी दी थी। जब तक अस्पताल ले जाते उसने दम तोड़ दिया। बहू मौके पर ही थी। वहीं, आरोपी बीडीसी अनुज और प्रधान वीरेंद्र के खिलाफ मृतक से मारपीट कर जहर देने का आरोप था। अदालत में बचाव करते हुए अनुज ने बताया कि मृतक के भाई सुरेश और स्वयंभव की प्रधान वीरेंद्र से चुनावी रंजिश थी। वीरेंद्र ने सुरेश को प्रधानी के चुनाव में हराया था। उनका न तो दिनेश के घर आना-जाना था और न ही बहू से कोई रिश्ता। उन्हें चुनावी रंजिश में फंसाया गया।
बहू बोली-संपत्ति हड़पने के लिए फंसाया गया
हत्या में 16 साल तक मुकदमेबाजी झेल रही पूजा ने अदालत को बताया कि पति अपने भाई सुरेश के घर से खाना खा कर आए थे। रात 12 बजे उन्हें उल्टी होने लगी। तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो जेठ स्वयंभव और पड़ोसियों से उन्हें अस्पताल ले जाने की गुहार लगाई, लेकिन तेज बारिश की वजह से सभी आनाकानी करने लगे और पति ने दम तोड दिया। पूजा ने यह भी आरोप लगाया कि पति की संपत्ति हड़पने के लिए उसे फंसाया गया।
कोर्ट ने कहा...पत्नी की मौजूदगी ही उसकी बेगुनाही का सुबूत
ट्रायल कोर्ट ने अभियोजन की ओर से पेश गवाहों और सबूतों के साथ साक्ष्य अधिनियम की धारा छह और सात के तहत आरोपी के आचरण और घटना के संव्यवहार के विधिक प्रावधान का जिक्र किया। कहा कि अपराध करने के बाद सामान्य व्यवहार में अपराधी घटनास्थल से भागने की कोशिश करता है, लेकिन पूजा मौके पर मौजूद थी। इसके अलावा अभियोजन मृतक की चार बेटियों और गांव के उन लोगों की गवाही कराने में विफल रहा, जिन्हें अस्पताल ले जाने के लिए रात में बुलाया गया।