लाक डाउन के दौरान प्रदेश के वकीलों को सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिल सकी। जबकि हाईकोर्ट ने वकीलों और उनके क्लर्कों को मदद दिए जाने के मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए न्यासी समिति को आदेश दिया था वह वकीलों को मदद दे और अगर उसके पास मदद के लिए बजट नहीं है तो वह बैंक से लोन लेकर वकीलों की मदद करें। मगर न्यासी समिति ने हाईकोर्ट से आदेश वापस लेने के लिए रिकॉल अर्जी दाखिल कर दी। अब अर्जी पर 11 जून को सुनवाई होनी है।
वकीलों को मदद देने के लिए बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने सरकार ने 150 करोड़ रुपये की मांग की थी। वहीं हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने जरूरतमंद वकीलों को अपने फंड से दो-दो हजार रुपये की मदद दी। उसे भी बार कौंसिल और सरकार की ओर सेकोई मदद नहीं मिल सकी। जिला अधिवक्ता संघों ने भी जरूरतमंद वकीलों की मदद अपने आर्थिक स्रोतों से ही की । यहां तक की बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने जिस एक करोड़ रुपये की मदद देने का भरोसा दिया वह रकम भी यूपी बार कौंसिल को नहीं मिल सकी।