पांच जुलाई के फैसले में अदालत ने निर्देश दिया कि प्रत्येक याचिकाकर्ता जिनके दावों को यहां अनुमति दी गई है उसे 25000 रुपये का भुगतान किया जाय। याचिकाकर्ताओं ने एक जून 2021 के सरकारी आदेश को मुख्य रूप से इस आधार पर चुनौती दी थी कि यह अधिकतम सीमा प्रदान करता है, जो केवल 30 दिनों के भीतर मृत्यु होने पर मुआवजे के भुगतान को प्रतिबंधित करता है।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि इस सरकारी आदेश का उद्देश्य उस परिवार को मुआवजा देना है, जिसने कोविड के कारण पंचायत चुनाव के दौरान अपनी रोटी कमाने वाले को खो दिया है। यह तर्क दिया गया था कि राज्य के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि याचिकाकर्ता पति की मृत्यु कोविड के कारण हुई थी, लेकिन भुगतान केवल खंड 12 में निहित सीमा के कारण किया जा रहा है, जो केवल 30 दिनों के भीतर मृत्यु होने पर मुआवजे के भुगतान को प्रतिबंधित करता है।
यह प्रस्तुत किया गया था कि मृत्यु को 30 दिनों तक सीमित रखने का कोई उचित कारण नहीं था और अक्सर यह देखा गया है कि व्यक्तियों की मृत्यु 30 दिनों के बाद भी होती है। यह तर्क दिया गया है कि ऐसे मुद्दों की जांच करने के लिए सक्षम प्राधिकारी को विवेकाधिकार दिया जाना चाहिए और 30 दिनों की सीमा पूरी तरह से तर्कहीन लगती है।