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प्रयागराज : साहा की दिखाई राह पर चला ‘आदित्य एल-1’ इविवि में बोले- पद्मभूषण प्रोफेसर दीपक धर

Sat, 07 Oct 2023 03:39 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

प्रो. साहा की जयंती पर शुक्रवार को आयोजित इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के भौतिक विज्ञान विभाग के शताब्दी समारोह वर्ष में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए प्रो. दीपक धर को विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने ‘मेघनाद शाहा शताब्दी स्वर्ण पदक’ और ‘डॉक्टर ऑफ साइंस’ की मानद उपाधि प्रदान की।
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प्रो. दीपक धर को कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने मेघनाथ साहा शताब्दी स्वर्ण पदक से सम्मानित किया। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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एस्ट्रो फिजिक्स की शुरुआत प्रो. मेघनाद साहा के समय हुई। यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं कि उन्हीं की दिखाई राह पर आज हम ‘आदित्य एल-1’ के जरिये सूरज के करीब पहुंच रहे हैं। यह बात सांख्यिकी-भौतिकी के विख्यात वैज्ञानिक एवं पद्मभूषण प्रो. दीपक धर ने कही।

प्रो. साहा की जयंती पर शुक्रवार को आयोजित इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के भौतिक विज्ञान विभाग के शताब्दी समारोह वर्ष में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए प्रो. दीपक धर को विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने ‘मेघनाद शाहा शताब्दी स्वर्ण पदक’ और ‘डॉक्टर ऑफ साइंस’ की मानद उपाधि प्रदान की। कुलपति ने कहा कि प्रो. धर के लिए मानद उपाधि पर हस्ताक्षर करना सम्मान का विषय है।

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प्रो. दीपक धर ने ‘मेघनाथ साहाः एक अग्रणी को श्रद्धांजलि’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि प्रो. साहा को ‘पायोनियर’ की संज्ञा दी जा सकती है। प्रो. साहा ने खोज की थी कि सूरज की रोशनी के स्पेक्ट्रम से पता लगाया जा सकता है कि सूरज में कौन-कौन से तत्व मौजूद हैं। प्रो. साहा ने 100 साल पहले सूरज को समझने की जो शुरुआत की, उसी पर आधारित विकसित हुई तकनीक के माध्यम से आज हम ‘आदित्य एल-1’ तक पहुंच सके हैं।

इविवि के भौतिक विज्ञान विभाग में मेघनाथ साहा के ऊपर वक्तव्य देते प्रो. दीपक धर। - फोटो : अमर उजाला।

विज्ञान के जरिए हालात पर पा सकते हैं काबू

प्रो. धर ने कहा कि विज्ञान बहुत बड़ा है और हमारा ज्ञान बहुत कम। हमेशा कुछ न कुछ करते रहने की जरूरत है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन को बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि अब यह तो संभव नहीं है कि हम 100 साल पुराने वक्त में लौट सकें, लेकिन यह संभव है कि विज्ञान के जरिये अनियंत्रित होते हालात पर काबू पा सकें।


प्रो. धर का सांख्यिकी-भौतिकी पर बड़ा काम रहा है, जिसका उपयोग भूकंप की जटिलता को समझने के लिए भी किया जाता है। उन्होंने बताया कि विज्ञान के जरिये यह संभव हो सका है कि आज हम छोटे-छोटे भूकंप का सटीक पूर्वानुमान लगाने लगे हैं, लेकिन बड़े भूंकप का पूर्वानुमान लगाने के लिए हमारे पास कोई तकनीक नहीं है। इस दिशा में काम करने की जरूरत है।

अद्भुत है कि प्रो. साहा की सफलता की कहानी

प्रो. धर ने कहा कि प्रो. साहा की सफलता की कहानी भी अद्भुत है। युवाओं को उनकी कहानी से प्रेरणा लेनी चाहिए। प्रो. साहा के पिता सब्जी बेचा करते थे। उन्होंने बेटे से कह दिया था कि दसवीं के आगे नहीं पढ़ा सकेंगे, लेकिन प्रो. साहा ने हिम्मत नहीं हारी और डटे रहे। किसे पता था कि वह आगे चलकर दुनिया के अग्रणी वैज्ञानिकों में शामिल होंगे और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भौतिक विज्ञान विभाग की स्थापना करेंगे। प्रो. साहा की काबिलियत थी कि उन्होंने 1905 में जर्मन भाषा में प्रकाशित आइंस्टीन के शोध ‘सापेक्षता का सिद्धांत’ यानी ‘थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी’ का अंग्रेजी में अनुवाद किया और इस अनुवाद ने अंग्रेजी भाषी देशों को एक नई दिशा प्रदान की।

वैज्ञानिक बनाए नहीं जाते, बनते हैं

प्रो. दीपक धन ने कहा कि वैज्ञानिक बनाए नहीं, बल्कि बन जाते हैं। जरूरी नहीं कि हर बच्चा विज्ञान के क्षेत्र में जाए। खेल, संगीत,साहित्य सहित तमाम ऐसे क्षेत्र हैं, जहां प्रतिभाएं निकलती हैं। यह बच्चे की रुचि पर निर्भर करता है। यह बात हम सबको समझनी चाहिए। अच्छे और उच्चकोटि के वैज्ञानिक तभी मिलेंगे, जब वे अपनी रुचि से इस विषय को अपनाएंगे।
 

इविवि के छात्र रहे हैं प्रो. धर

प्रो. दीपक धर ने 1970 में इविवि से बीएससी की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद आईआईटी कानपुर से एमससी और शोध किया। 1980 में उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में फेलो के रूप में ज्वाइन किया और 2016 में रिटायर हुए। वर्ष 2022 में उन्हें बोल्ट्जमैन मेडल और 2023 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।

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मां ने प्रो. साहा की पढ़ाई के लिए बेच दिए थे कंगन

 

इविवि के भौतिक विज्ञान विभाग के शताब्दी समारोह में बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रो. गौतम गंगोपाध्याय ने कहा कि प्रो. मेघनाद साहा की प्राइमरी की पढ़ाई भी बहुत कठिनाई के साथ हुई। प्रो. गंगोपाध्याय ने प्रो. साहा से जुड़ी एक कहानी भी सुनाई। उन्होंने बताया कि प्रो. साहा की फीस जमा करने के लिए उनकी माता ने अपना एक मात्र सोने का कंगन तक बेच दिया था।

इंदिरा गांधी परमाणु केंद्र कलपक्कम तमिलनाडु के डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रो. अवधेश मणि ने प्रयागराज में तीन नदियाें के संगम की उपमा अनुसंधान केंद्र स्थित तीन प्रकार के न्यूक्लियर रिएक्टर से की। उन्होंने अपने व्याख्यान में उच्च तापमान, अति चालक पदार्थों और मैग्नेटाइट्स पर भी चर्चा की। समारोह में उत्तर प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह गौड़ भी मौजूद रहे। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. केएन उत्तम ने किया।

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