किशोरों पर ऑनलाइन गेम का नशा इस कदर हावी हुआ है कि वह छोटी सी उम्र में बड़े अपराध करने से भी नहीं कतरा रहे हैं। मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय (कॉल्विन) के मन कक्ष और स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय के मनोरोग विभाग में हर साल करीब 100 मामले ऑनलाइन गेमिंग की लत को लेकर आ रहे हैं।
इनमें से कई किशोरों ने आत्महत्या का प्रयास किया। कुछ ने अपने पिता के क्रेडिट कार्ड से लाखों रुपये उड़ा दिए और कुछ किशोर ऑनलाइन गेमिंग के चक्कर में चोरी तक करने लगे। इतना ही नहीं इन किशोरों को जब काउंसलिंग के लिए लाया जाता है तो इन्हें इस बात का आभास ही नहीं होता है कि उनके कृत्य अपराध की श्रेणी में आते हैं।
ऑनलाइन गेमिंग की लत के संकेत
1- गेम खेलने के लिए कक्षाएं छोड़ना।
2- दोस्तों के साथ कम समय बिताना या परिवार के साथ मिलने-जुलने से बचना।
3- पैसे से खेले जाने वाले खेलों के बारे में झूठ बोलना।
4- खराब पोषण, स्वास्थ्य और नींद।
5- गेमिंग के लिए पैसे या मूल्यवान चीजें उधार लेना या चुराना।
6- गेमिंग के बारे में बार-बार सोचते रहना।
इस तरह अपने बच्चे से करें बात
2- मुद्दों पर चर्चा करते समय सक्रिय रूप से सुनना महत्वपूर्ण है, यदि यह बातचीत के माध्यम से होगा तो आपका किशोर संदेश के लिए अधिक ग्रहणशील होगा।
3- छोटी बातचीत से संदेश घर तक पहुंच जाएगा। लंबे-चौड़े व्याख्यानों से आपका किशोर बहुत जल्दी ही ध्यान भटका सकता है।
4- बातचीत को किशोर की रुचियों के अनुसार ढालें। जैसे अगर आपका बच्चा वीडियो गेम खेलना पसंद करता है तो ईस्पोर्ट्स बेटिंग पर चर्चा करने पर विचार करें।
बच्चों के साथ समय बिताना जरूरी है। इसके लिए अभिभावक हर हाल में समय जरूर निकालें। बच्चों की हर अच्छी बुरी आदत बात करने पर ही सामने आती है। - डॉ. वीके सिंह, विभागाध्यक्ष, मनोरोग विभाग, एमएलएन मेडिकल कॉलेज
हर महीने ऑनलाइन गेमिंग की लत के करीब पांच किशोर आते हैं। इन्हें अच्छे व बुरे का बोध नहीं होता, सिर्फ खेलने का नशा होता है। अपने बच्चों को मोबाइल देने के साथ इस बात का भी ध्यान रखें कि वह इसे कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं। - डॉ. राकेश पासवान, मनोचिकित्सक, कॉल्विन अस्पताल