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Online Games : ऑनलाइन गेम की लत बच्चों को बना रही अपराधी, आत्महत्या का भी करते हैं प्रयास

Thu, 22 May 2025 06:09 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

गोविंदपुर में कोचिंग के लिए आए जौनपुर निवासी 17 वर्षीय किशोर को ऑनलाइन मोबाइल गेम की ऐसी लत लगी कि उसने अपने पिता के क्रेडिट कार्ड से लाखों रुपये पार कर दिए। बैंक स्टेटमेंट सामने आने पर पिता को इसकी जानकारी हुई।
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ऑनलाइन गेम्स। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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केस एक

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गोविंदपुर में कोचिंग के लिए आए जौनपुर निवासी 17 वर्षीय किशोर को ऑनलाइन मोबाइल गेम की ऐसी लत लगी कि उसने अपने पिता के क्रेडिट कार्ड से लाखों रुपये पार कर दिए। बैंक स्टेटमेंट सामने आने पर पिता को इसकी जानकारी हुई। इसके बाद किशोर को काउंसलिंग के लिए एसआरएन के मनोरोग विभाग लाया गया, जहां उसने बताया कि वह गेम में लाखों रुपये हार गया था। इसकी भरपाई करने के लिए उसने पिता के क्रेडिट कार्ड से रुपये लिए हैं। उसका कहना था कि गेम में रुपये जीतते ही वह पिता को वापस कर देगा।

केस दो

तेलियरगंज निवासी 13 वर्षीय किशोर के जन्म दिन पर उसके पिता ने मोबाइल गिफ्ट किया। बेटे ने दोस्तों के कहने पर एक एप के जरिये ऑनलाइन गेम खेलना शुरू कर दिया। इस दौरान घर से पैसे चोरी होने की घटनाएं बढ़ने लगी। काफी प्रयास के बाद जब कुछ पता नहीं चला तो अपने एक पुलिस दोस्त के जरिये पिता ने बेटे से पूछताछ कराई। इसके बाद पता चला कि वह गेम में रुपये लगाने के लिए पैसे चुरा रहा था।
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केस तीन

सिविल लाइंस निवासी 15 वर्षीय किशोर ऑनलाइन गेम के चक्कर में करीब तीन लाख रुपये हार गया। इसके बाद उसने कुछ लोगों से कर्ज लिया। लेकिन न तो वह गेम में जीत सका और न ही कर्ज की भरपाई कर सका। जब कर्जदारों ने उसे घेरना शुरू किया तो उसने अपने हाथ की नस काटकर जान देने का प्रयास किया। वहीं, कॉल्विन अस्पताल के मन कक्ष में जब काउंसलिंग हुई तो उसने इस घटना के बारे में जानकारी दी।

किशोरों पर ऑनलाइन गेम का नशा इस कदर हावी हुआ है कि वह छोटी सी उम्र में बड़े अपराध करने से भी नहीं कतरा रहे हैं। मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय (कॉल्विन) के मन कक्ष और स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय के मनोरोग विभाग में हर साल करीब 100 मामले ऑनलाइन गेमिंग की लत को लेकर आ रहे हैं।

इनमें से कई किशोरों ने आत्महत्या का प्रयास किया। कुछ ने अपने पिता के क्रेडिट कार्ड से लाखों रुपये उड़ा दिए और कुछ किशोर ऑनलाइन गेमिंग के चक्कर में चोरी तक करने लगे। इतना ही नहीं इन किशोरों को जब काउंसलिंग के लिए लाया जाता है तो इन्हें इस बात का आभास ही नहीं होता है कि उनके कृत्य अपराध की श्रेणी में आते हैं।

ऑनलाइन गेमिंग की लत के संकेत

1- गेम खेलने के लिए कक्षाएं छोड़ना।
2- दोस्तों के साथ कम समय बिताना या परिवार के साथ मिलने-जुलने से बचना।

3- पैसे से खेले जाने वाले खेलों के बारे में झूठ बोलना।
4- खराब पोषण, स्वास्थ्य और नींद।

5- गेमिंग के लिए पैसे या मूल्यवान चीजें उधार लेना या चुराना।
6- गेमिंग के बारे में बार-बार सोचते रहना।
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इस तरह अपने बच्चे से करें बात

2- मुद्दों पर चर्चा करते समय सक्रिय रूप से सुनना महत्वपूर्ण है, यदि यह बातचीत के माध्यम से होगा तो आपका किशोर संदेश के लिए अधिक ग्रहणशील होगा।
3- छोटी बातचीत से संदेश घर तक पहुंच जाएगा। लंबे-चौड़े व्याख्यानों से आपका किशोर बहुत जल्दी ही ध्यान भटका सकता है।
4- बातचीत को किशोर की रुचियों के अनुसार ढालें। जैसे अगर आपका बच्चा वीडियो गेम खेलना पसंद करता है तो ईस्पोर्ट्स बेटिंग पर चर्चा करने पर विचार करें।

बच्चों के साथ समय बिताना जरूरी है। इसके लिए अभिभावक हर हाल में समय जरूर निकालें। बच्चों की हर अच्छी बुरी आदत बात करने पर ही सामने आती है। - डॉ. वीके सिंह, विभागाध्यक्ष, मनोरोग विभाग, एमएलएन मेडिकल कॉलेज

हर महीने ऑनलाइन गेमिंग की लत के करीब पांच किशोर आते हैं। इन्हें अच्छे व बुरे का बोध नहीं होता, सिर्फ खेलने का नशा होता है। अपने बच्चों को मोबाइल देने के साथ इस बात का भी ध्यान रखें कि वह इसे कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं। - डॉ. राकेश पासवान, मनोचिकित्सक, कॉल्विन अस्पताल
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