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Prayagraj : माफिया की कुर्क जमीन पर बना मकान, हो गई प्लॉटिंग, 10 महीने बाद भी कार्रवाई नहीं

Thu, 22 May 2025 05:01 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

पूरामुफ्ती में माफिया अतीक अहमद के भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ की कुर्क की गई 5500 वर्ग गज जमीन पर अवैध निर्माण और प्लॉटिंग का मामला 10 महीने बीत जाने के बाद भी ठंडे बस्ते में पड़ा है।
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अतीक अहमद-अशरफ। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पूरामुफ्ती में माफिया अतीक अहमद के भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ की कुर्क की गई 5500 वर्ग गज जमीन पर अवैध निर्माण और प्लॉटिंग का मामला 10 महीने बीत जाने के बाद भी ठंडे बस्ते में पड़ा है। सामने आने के बाद यह मामला प्रशासनिक लापरवाही की मिसाल तो बना ही। अब तक विवेचना पूरी न होने और ठोस कार्रवाई न होने से पुलिस व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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2008 में हुई थी कार्रवाई, हो गया कब्जा

14 जुलाई 2008 को गैंगस्टर एक्ट की धारा 14 (1) के तहत अशरफ की दो संपत्तियां- आराजी संख्या 1115 (0.4680 हेक्टेयर) और आराजी संख्या 808 (0.1140 हेक्टेयर) को कुर्क किया गया था। ये दोनों जमीनें अपराध से अर्जित संपत्तियों की श्रेणी में आती थीं, जो उस समय राजस्व अभिलेखों में अशरफ के नाम पर दर्ज थीं। कुर्की के बावजूद, इसी जमीन पर तीन मकान बना दिए गए और शेष हिस्से में प्लॉटिंग कर दी गई। यह तब सामने आया जब पिछले वर्ष प्रशासन को इसकी जानकारी मिली और लेखपाल महेंद्र कुमार व स्थानीय पुलिस द्वारा स्थलीय निरीक्षण कराया गया।

एफआईआर के बाद भी नहीं हुई कोई ठोस कार्रवाई

स्थलीय जांच के बाद दो जुलाई 2024 को अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। हालांकि, अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। जमीन की रजिस्ट्री और प्लॉटिंग में शामिल लोगों की पहचान तक नहीं हो पाई है।

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विभागों में टालमटोल का खेल

पुलिस का कहना है कि उन्होंने राजस्व विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जो अब तक प्राप्त नहीं हुई है, इसलिए विवेचना लंबित है। वहीं, राजस्व विभाग स्पष्ट जवाब देने से बच रहा है। इसे लेकर दो आशंकाओं को भी बल मिल रहा है। पहली यह कि या तो विभागों में समन्वय की भारी कमी है। दूसरी आशंका यह है कि कहीं यह साजिशन मामला दबाने की कोशिश तो नहीं।

प्रशासनिक साख पर सवाल

कुर्क की गई जमीन पर अवैध कब्जा होना और 10 महीने तक कोई ठोस कार्रवाई न हो पाना, प्रशासनिक साख और नीयत दोनों पर सवाल खड़े करता है। यह भी समझ से परे है कि राजस्व रिकाॅर्ड में दर्ज कुर्क संपत्ति पर निर्माण कार्य कैसे हुआ। सवाल यह भी है कि संबंधित अधिकारी इतने समय तक मौन क्यों रहे।

अब तक की स्थिति:

जमीन कुर्की: जुलाई 2008
सूचना उजागर: जून 2024
एफआईआर दर्ज: 2 जुलाई 2024
गिरफ्तारी/कार्रवाई: 0
विवेचना की स्थिति: लंबित

उठ रहे सवाल

1. कुर्क जमीन पर कब्जा, प्लॉटिंग और अवैध निर्माण कैसे हुआ।
2- प्रशासक को कैसे नहीं लगी भनक।
3- एफआईआर के 10 महीने बाद भी ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
4- कुर्क जमीन बेचने वाले चिह्नित क्यों नहीं हो सके।
5- पुलिस के दावे सही हैं तो राजस्व विभाग अब तक क्यों नहीं दे सका रिपोर्ट।
6. मामले को दबाने की साजिश तो नहीं।

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इन मामलों में भी अटकी कार्रवाई
 

  • - माफिया की कुर्क जमीन पर अवैध कब्जे का उपरोक्त मामला इकलौता नहीं है।
  • - अतीक अहमद की सिविल लाइंस में एमजी मार्ग स्थित जमीन पर भी किया गया था कब्जा।
  • - हाईकोर्ट के पास स्थित जमीन पर कराया जा रहा था अवैध निर्माण।
  • - पूर्व में गैंगस्टर के तहत कुर्क हुई थी जमीन।
  • - एसडीएम सदर को नियुक्त किया गया था जमीन का प्रशासक।
  • - करेली के सोलह मार्केट के पास स्थित जमीन पर भी किया जा रहा था कब्जा।
  • - गैंगस्टर में कुर्क हो चुकी थी संपत्ति।
  • - सिविल लाइंस व करेली में दर्ज हुआ था मुकदमा।
  • - दोनों मुकदमों में भी अब तक अटकी है कार्रवाई, विवेचना लंबित।


माफिया की कुर्क जमीनों का सत्यापन कराए जाने के संबंध में सभी एसीपी को निर्देशित किया गया है। कुर्क जमीनों पर अवैध कब्जे के संबंध में जो मुकदमे पंजीकृत हैं, उनकी स्थिति के बारे में रिपोर्ट मांगी गई है। विवेचना लंबित है तो इसका भी पता लगाया जाएगा। जल्द ही इनका निस्तारण कराया जाएगा। - अभिषेक भारती, डीसीपी नगर

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