7.5 लाख का देना पड़ा है मुआवजा
इस मामले में मानवाधिकार आयोग के आदेश के बाद प्रदेश सरकार को 7.5 लाख के मुआवजे का भुगतान मृतक बंदी के आश्रित परिजनों को करना पड़ा है। इससे पहले इसी मामले की सुनवाई करते हुए आयोग ने मुख्य सचिव को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। तय अवधि में जवाब दाखिल न करने पर आयोग ने 21 अगस्त 2023 को मुख्य सचिव को समन जारी कर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब दाखिल करने का भी निर्देश दिया था। बाद में तय अवधि में जवाब दाखिल किए जाने पर उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति के आदेश को निरस्त कर दिया गया था।
यह है मामला
हंडिया के उपरदहा का रहने वाला सूरज चौहान पुत्र उमरांव 2019 में एनडीपीएस के मामले में गिरफ्तार कर नैनी जेल भेजा गया था। तबीयत बिगड़ने पर उसे एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 31 जनवरी 2020 को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। तत्कालीन जेल प्रशासन का कहना था कि वह बीमार था। मामले में नया मोड़ तब आ गया, जब बंदी के शरीर पर मिले चोटों के संबंध में मजिस्ट्रियल जांच के दौरान तत्कालीन जेल प्रशासन संतोषजनक स्पपष्टीकरण नहीं दे पाया।
शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंची जिसके बाद मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट के आधार पर यह माना गया कि प्रथम दृष्टया बंदी की अभिरक्षा के दौरान मौत संदेहजनक परिस्थितियों में उसके साथ मारपीट कर गंभीर चोट पहुंचाए जाने से संबंधित है। इसके बाद आयोग के आदेश पर तत्कालीन जेल प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।