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हाईकोर्ट ने कहा : बंदी की मौत मामले में डॉक्टरों के बयान के बाद होगी कार्रवाई, जेल प्रशासन पर दर्ज है मुकदमा

Sun, 31 Dec 2023 02:23 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

घटना के दौरान मृतक बंदी के साथ बैरक में निरुद्ध बंदियों व बंदीरक्षकों के साथ ही तत्कालीन अफसरों का बयान दर्ज हो चुका है। हालांकि, अभी डॉक्टरों का बयान नहीं लिया जा सका है। इनमें जेल अस्पताल के साथ ही बंदी के शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर भी शामिल हैं।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : Amar ujala
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विस्तार
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नैनी जेल के बंदी सूरज चौहान की मौत के मामले में दर्ज मुकदमे की विवेचना 11 महीने से अधूरी रहने में पता चला है कि अभी डॉक्टरों का बयान नहीं हो सका है। दरअसल, इसमें जेल अस्पताल के तत्कालीन डॉक्टराें व बंदी के शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों से भी पूछताछ होनी है। डॉक्टरों का बयान दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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मामले में मानवाधिकार आयोग के आदेश पर 16 जनवरी को नैनी थाने में तत्कालीन जेल प्रशासन पर गैरइरातन हत्या का केस दर्ज हुआ है। इस मुकदमे की विवेचना अब तक पूरी नहीं हो सकी है। सूत्रों का कहना है कि विवेचना के क्रम में मामले से संबंधित सभी लोगों का बयान दर्ज किया जाना जरूरी है। हालांकि, अभी यह कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी है।

घटना के दौरान मृतक बंदी के साथ बैरक में निरुद्ध बंदियों व बंदीरक्षकों के साथ ही तत्कालीन अफसरों का बयान दर्ज हो चुका है। हालांकि, अभी डॉक्टरों का बयान नहीं लिया जा सका है। इनमें जेल अस्पताल के साथ ही बंदी के शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर भी शामिल हैं।
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दरअसल, जेल अस्पताल के डॉक्टरों की सलाह पर ही उसे एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जबकि पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने ही बताया था कि उसके शरीर पर गंभीर चोट के निशान पाए गए थे। नैनी थाना प्रभारी यशपाल सिंह ने बताया कि विवेचक को निर्देशित किया गया है कि वह बयान दर्ज करने समेत अन्य सभी प्रक्रियाएं पूरी कर निष्पक्ष तरीके से विवेचना को आगे बढ़ाएं।

7.5 लाख का देना पड़ा है मुआवजा

इस मामले में मानवाधिकार आयोग के आदेश के बाद प्रदेश सरकार को 7.5 लाख के मुआवजे का भुगतान मृतक बंदी के आश्रित परिजनों को करना पड़ा है। इससे पहले इसी मामले की सुनवाई करते हुए आयोग ने मुख्य सचिव को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। तय अवधि में जवाब दाखिल न करने पर आयोग ने 21 अगस्त 2023 को मुख्य सचिव को समन जारी कर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब दाखिल करने का भी निर्देश दिया था। बाद में तय अवधि में जवाब दाखिल किए जाने पर उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति के आदेश को निरस्त कर दिया गया था।
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यह है मामला

हंडिया के उपरदहा का रहने वाला सूरज चौहान पुत्र उमरांव 2019 में एनडीपीएस के मामले में गिरफ्तार कर नैनी जेल भेजा गया था। तबीयत बिगड़ने पर उसे एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 31 जनवरी 2020 को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। तत्कालीन जेल प्रशासन का कहना था कि वह बीमार था। मामले में नया मोड़ तब आ गया, जब बंदी के शरीर पर मिले चोटों के संबंध में मजिस्ट्रियल जांच के दौरान तत्कालीन जेल प्रशासन संतोषजनक स्पपष्टीकरण नहीं दे पाया।

शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंची जिसके बाद मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट के आधार पर यह माना गया कि प्रथम दृष्टया बंदी की अभिरक्षा के दौरान मौत संदेहजनक परिस्थितियों में उसके साथ मारपीट कर गंभीर चोट पहुंचाए जाने से संबंधित है। इसके बाद आयोग के आदेश पर तत्कालीन जेल प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
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