अमेरिका से आए कथाकार इंद्रजीत शर्मा ने बृहस्पतिवार को हिंदी के विस्तार लेते फलक पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि अमेरिका में हिंदी का प्रचार-प्रसार बहुत दिखाई पड़ने लगा है। जगह- जगह पर पोस्टर, बैनर हिंदी में छपने लगे हैं। वहां भी होली-दिवाली जैसे भारतीय त्योहारों को परंपरा के अनुसार हिंदी में ही मनाते हैं। यह बातें उन्होंने प्रयाग साहित्य महोत्सव के समापन अवसर पर कही। यह महोत्सव हिंदुस्तानी एकेडेमी और नया परिमल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित था।
बतौर मुख्य अतिथि एडीजी प्रेम प्रकाश ने कहा कि सबसे ज्यादा ऊर्जा युवाओं में होती है। युवा ही देश में परिवर्तन ला सकते हैं। उन्होंने हिंदी साहित्य के प्रति लगाव से जुड़े कई संस्मरण सुनाए और कविताओं के पाठ के साथ एक गीत भी गाया। डॉ. आशीष कांधवे ने कहा कि प्रयाग गंगा-जमुना और सरस्वती का संगम ही नहीं अनेक भाषाओं और संस्कृतियों का भी संगम है। यहां पर स्थानों से आकर हिंदी के कई रचनाकार बस गए।
उन्होंने अपनी गजलें भी सुनाईं। समापन समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. कन्हैया सिंह ने की। इनके अलावा सेवा निवृत्त आईपीएस केपी सिंह, एकेडेमी के सचिव देवेंद्र प्रताप सिंह, इलाहाबाद विवि हिंदी विभाग के प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. अमरेंद्र त्रिपाठी, डॉ. सुजीत कुमार सिंह, डॉ. चितरंजन कुमार और डॉ. अमृता उपस्थित थे। संचालन डॉ. विनम्र सेन सिंह ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अमरेंद्र त्रिपाठी ने। इस मौके पर डॉ. बृजेश पांडेय, डॉ. लक्ष्मण गुप्ता, शोधार्थी बाल करन सिंह, चंद्र शेखर कुशवाहा, अनूप कुमार द्विवेदी, सौरभ त्रिपाठी, रीमा यादव, दीक्षा त्रिपाठी समेत तमाम लोग उपस्थित थे।