फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संन्यासिनी बनीं आचार्य किरन

विज्ञापन
Acharya Kiran, who became sanyasinine - फोटो : CITY DESK
विज्ञापन
फोटो सहित
विज्ञापन

00
संगम पर खुद का पिंडदान कर
संन्यासिनी बनीं आचार्य किरन
0 मौजगिरि मंदिर परिसर के जूना मुख्यालय में दीक्षा एवं चादरविधि आज
प्रयागराज। पंचदशनाम जूना अखाड़े से जुड़कर अखाड़े की श्रीमहंत बनने के क्रम में लखनऊ स्थित साई ज्योतिष संस्थान की निदेशक ज्योतिर्विद गुरु माँ किरन आचार्य सोमवार को स्वयं का पिंडदान करने संन्यासिनी बन गईं। अखाड़े के पुरोहितों की देखरेख में उन्होंने गंगा स्नान के बाद संगम किनारे ही उन्होंने खुद के लिए सत्रहवां पिंडदान किया।
संन्यासिनी बनाने की प्रक्रिया के तहत सबसे पहले उनका मुंडन संस्कार कराया गया। फिर गंगा स्नान, भस्म स्नान, गोमूूत्र, गाय के गोबर, पंचगव्य, पंचामृत स्नान, गंगा स्नान के बाद वस्त्र दिए गए। पुरुषों की तरह उन्हें भी परंपरानुसार पलाश का दंड और कुल्हड़ का कमंडल दिया गया। पिंडदान के बाद उन्होंने गंगा में पिंडों को विसर्जित किया। आधी रात के बाद आचार्यों की देखरेख में अखाड़े की छावनी में विजयाहवन संस्कार किया गया। इस बीच ओम नम:शिवाय का जाप भोर तक जारी रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन

जूना अखाड़े के संरक्षक और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरिगिरि के मुताबिक अब मंगलवार को यमुना बैंक रोड स्थित जूना अखाड़े के मुख्यालय मौजगिरि मंदिर परिसर में उन्हें चादरविधि के बाद श्रीमहंत की पदवी से विभूषित किया जाएगा। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के आचार्यत्व में गुरु मां किरन आचार्य की संन्यास दीक्षा होगी। इसमें सभी अखाड़ों के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। विधिवत संन्यास के दौरान उनका नया नामकरण भी किया जाएगा। इससे पहले रविवार को संन्यास की प्रक्रिया आरंभ हुई थी। इसके तहत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संकल्प के बाद क्षौरकर्म, गंगा स्नान, पिंडदान सहित उन्होंने अन्य समस्त दान दिए थे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें