दो देसी बम रखने के आरोपी ने स्वेच्छा से 18 साल बाद जुर्म कबूूल कर लिया। इस पर जिला अदालत ने उसे एक साल का कारावास और दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही कहा कि किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे रिहा किया जाए। क्योंकि, वह पहले ही 10 माह जेल में बिता चुका है। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश पूनम त्रिवेदी ने दिया।
20 मई 2008 को जॉर्जटाउन की पुलिस चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान कुंदन गेस्ट हाउस के पास रेलवे लाइन किनारे से आ रहा एक व्यक्ति पुलिस को देखकर भागने की कोशिश की। शक पर पुलिस ने उसे पकड़ लिया। तलाशी में उसके पास प्लास्टिक की थैली से दो देसी सुतली के बम मिले। पूछताछ में वह लाइसेंस या अधिकार पत्र नहीं दिखा सका।
पुलिस ने आरोपी राजेश कुमार निवासी अल्लापुर के खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की थी। आरोपी ने अदालत में अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आरोपी की आर्थिक स्थिति खराब होने, घर में कोई कमाने वाला न होने और 10 माह से जेल में रहने का हवाला देते हुए न्यूनतम सजा की मांग की थी।
अदालत ने आरोपी को विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत विस्फोटक पदार्थ बनाने, रखने के आरोप में एक-एक साल का कारावास और एक-एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।