इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सामूहिक दुराचार के आरोपी की सशर्त जमानत मंजूर कर ली है और व्यक्तिगत मुचलके व दो प्रतिभूतियों पर रिहा करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत सिंह ने दीपक पाल की अर्जी को स्वीकार करते हुए दिया है। पीड़िता ने प्रयागराज के नैनी थाने में एफआईआर दर्ज कराकर प्लॉट दिखाने के बहाने स्कार्पियो गाड़ी में याची सहित तीन लोगों पर दुराचार करने और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है।
आरोपी याची का कहना था कि 14 अक्टूबर 20 की घटना की 28 अक्टूबर 20 को देरी से एफआईआर दर्ज कराई गई है। पीड़िता तीस साल की पढ़ी लिखी महिला है। उसके पति रेलवे में नौकरी करते हैं। याची से पहले से संबंध है। उसने याची से बिना पैसा दिए प्लॉट लिया है, दूसरा प्लॉट मांगा। याची के मना करने पर झूठे आरोप लगा कर फंसाया गया है। मेडिकल जांच रिपोर्ट में जबरन रेप के निशान नहीं मिले हैं। याची एक नवंबर 20 से जेल में बंद है।