इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिश्वत मांगने के मामले में सीबीआई की ओर से दर्ज मुकदमें में आरोपी को उन्मोचन प्रार्थना पत्र दाखिल करने की छूट प्रदान की है। याची को विशेष अदालत में 15 दिन के भीतर अर्जी दाखिल करनी होगी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिश्वत मांगने के मामले में सीबीआई की ओर से दर्ज मुकदमें में आरोपी को उन्मोचन प्रार्थना पत्र दाखिल करने की छूट प्रदान की है। याची को विशेष अदालत में 15 दिन के भीतर अर्जी दाखिल करनी होगी। इस दौरान उसके खिलाफ कोई भी उत्पीड़नात्मक कार्यवाही नहीं की जाएगी। यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की अदालत ने याची रईस अहमद की याचिका पर दिया है।
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रईस अहमद पिछले 25 वर्षों से केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) से जुड़े एक संस्थान में तैनात थे। याची पर 50 लाख रुपए रिश्वत मांगने का आरोप है। वह अस्पताल के एक सहयोगी के साथ पांच लाख रुपये लेकर मेरठ स्थित सीजीएचएस कार्यालय पहुंचे थे। अगले दिन शेष रकम देने के लिए लौटते समय सीबीआई ने उन्हें बैग सहित पकड़ लिया।
इस मामले में रईस अहमद और अन्य आरोपियों के खिलाफ सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच, गाजियाबाद में मुकदमा दर्ज है। सीबीआई ने मामले में 10 अक्तूबर 2025 को आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद गाजियाबाद स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने 13 मई को समन आदेश पारित किया। रईस अहमद ने आरोप पत्र और समन आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।