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मुल्जिम लापता : 36 साल तक सुबूत न पेश कर सकी पुलिस, कोर्ट बोली- मुकदमा हो दाखिल दफ्तर

Thu, 13 Jun 2024 04:45 PM IST
विनोद सिंह सुनील यादव, प्रयागराज

सार

यह आदेश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शशि कुमार की अदालत ने दिया है। मामला प्रयागराज जिले के थाना कोतवाली का है। वर्ष 1988 में पुलिस ने राजेश उर्फ अनीश और राजकुमार के खिलाफ अवैध हथियार रखने के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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36 साल पहले आयुध अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमे के दो मुल्जिम लापता हैं। विवेचना के बाद मामला ट्रायल कोर्ट पहुंच गया, लेकिन 36 साल बाद भी पुलिस अदालत में मुल्जिम पेश कर सकी न गवाह। नतीजा, कोर्ट बोली गिरफ्तारी संभव नहीं, मुकदमा दाखिल दफ्तर (मुकदमा बंद किया जाना) हो।

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यह आदेश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शशि कुमार की अदालत ने दिया है। मामला प्रयागराज जिले के थाना कोतवाली का है। वर्ष 1988 में पुलिस ने राजेश उर्फ अनीश और राजकुमार के खिलाफ अवैध हथियार रखने के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी। विवेचना के बाद पुलिस ने मामले को 1988 में ही ट्रायल कोर्ट को सुपुर्द कर दिया। मामले में तारीख दर तारीख लगती रही लेकिन मुल्जिम पेश न हुआ। अदालत ने पहले जमानती और फिर गैर-जमानती वारंट जारी किया। लेकिन न दोनों मुज्लिम खुद पेश हुए न उन्हें पुलिस पेश कर सकी।

तीन दशक से इस मुकदमे का बोझ झेल रही अदालत ने जनवरी 2024 में कोतवाली पुलिस से गैर-जमानती वारंट पर आख्या मांगी। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि राजेश 25 साल पहले घर बेच कर कही जा चुका है जबकि राजकुमार नाम का कोई व्यक्ति दिए गए पते पर रहता नहीं। लिहाजा, कोर्ट ने मुज्लिम के गैर मौजूदगी में मुकदमे में गवाही शुरू करने का आदेश दिया और अभियोजन के गवाहों और सुबूतों को तलब किया। मुल्जिमों को पेश करने में विफल रही पुलिस अदालत में अपने गवाह और सुबूत भी न पेश कर सकी।

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कोर्ट ने अभियोजन साक्ष्य के अवसर समाप्त करते लापता मुल्जिमों के खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही को स्थगित कर दिया। गिरफ्तारी की गुंजाइश को खत्म मानते हुए कोर्ट ने मुकदमेे की पत्रावली को दाखिल दफ्तर करने का फैसला सुना दिया। हालांकि, कोर्ट ने दोनों मुल्जिमों के खिलाफ स्थायी वारंट जारी कर आदेश की प्रति पुलिस कमिश्नर को भेजी है।

कहां है अवैध हथियार ?

हैरानी की बात यह है कि पुलिस वो अवैध हथियार भी अदालत में बतौर सुबूत पेश नहीं कर पाई जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज हुआ। जबकि, मामला ट्रायल कोर्ट में भेजने से पहले विवेचक ने साक्ष्य संकलित कर कथित अवैध हथियार बरामद कर, मालखाने में जमा किया होगा।
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