संगमनगरी में एसी सर्विसिंग और मरम्मत पसीना छुड़ा दे रही है। भीषण गर्मी में ठंडी हवा की चाह जेब पर भारी पड़ रही है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे माल की किल्लत के कारण तांबे, एल्युमीनियम और रेफ्रिजरेंट गैस की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। एसी की मेंटेनेंस लागत 15 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गई है।
पिछले साल जो रेफ्रिजरेंट गैस यानी आर-32 गैस 800 रुपये प्रति किलो के भाव पर उपलब्ध थी, वह अब 1000-1100 रुपये तक पहुंच गई है। कारोबारी मिथिलेश सिंह का कहना है कि लॉजिस्टिक्स खर्च और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मची उथल-पुथल के कारण गैस रिफिलिंग महंगा सौदा बन चुकी है। डेढ़ टन के स्प्लिट एसी में गैस चार्ज कराने का खर्च पिछले साल के मुकाबले एक हजार से पंद्रह सौ रुपये तक ज्यादा बैठ रहा है।
एसी के पुर्जे भी महंगे हो गए हैं। एसी मैकेनिक मकसूद ने बताया कि तांबे की कीमतों में आई तेजी से कॉपर पाइप के दाम 1400 रुपये से बढ़कर 1500 रुपये प्रति किलो के पार चले गए हैं। इसी तरह एसी को सुरक्षित रखने वाला कैपिसिटर और इलेक्ट्रिक वायर भी महंगे हो गए हैं। एसी मैकेनिक मो. आरिफ ने बताया कि कैपिसिटर 170- 180 रुपये में मिल जाता था, अब 200-220 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।
विशेष इलेक्ट्रिक वायर की कीमत भी 50 रुपये से बढ़कर 70 रुपये प्रति मीटर हो गई है। इसी के साथ मैकेनिक भी सर्विसिंग चार्ज बढ़ा दिए हैं। कारोबारी केके श्रीवास्तव ने बताया कि एसी इंस्टालेशन का खर्च 1000 से 1200 रुपये पड़ता है लेकिन इस बीच तमाम मैकेनिक 1500 से 1800 रुपये लेने लगे हैं।