अभी तक नहीं बन सका है शिक्षकों का पैनल
प्रतियोगियों के लगातार मांग उठाने पर ग्रामीण क्षेत्राें में भी कोचिंग खोलने का निर्णय लिया गया। इसी क्रम में जिले में स्थित चारो आश्रम पद्धति विद्यालयों में कक्षाएं शुरू करने की योजना बनी। चूंकि यहां 12वीं तक की ही छात्राएं पढ़ती हैं, इसलिए यहां जेईई और नीट की तैयारी कराई जाएगी। इसके लिए मई से शुरू हुई कवायद अभी तक परवान नहीं चढ़ सकी है। विडंबना देखिए कि जो कोचिंग जुलाई में चालू हो जानी थी, उसके लिए अभी शिक्षकों का पैनल ही नहीं बन सका है।
पैनल में जेई व नीट के साथ सिविल सर्विसेज के लिए भी शिक्षकों की नियुक्ति की जानी है। महीनों के इंतजार के बाद नौ और 10 अगस्त को साक्षात्कार हो गए। चयन समिति ने 40 से अधिक शिक्षकों की सूची भी तैयार कर ली, लेकिन अभी सीडीओ की अनुमति ही नहीं मिल पाई।
सिविल सर्विसेज के लिए नहीं मिला स्थान
सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए बड़ी संख्या में प्रतियोगी ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं। इनमें छात्राओं की भी बड़ी संख्या है। इनकी मांग पर ग्रामीण क्षेत्रों में कोचिंग चलाने की योजना तो बनी, लेकिन स्थान ही नहीं खोज सके। एक-दो कॉलेजों से संपर्क किया गया, लेकिन बात नहीं बनी। अधिकारियों की दलील है कि निजी कॉलेज परिसर व छात्र-छात्राएं उपलब्ध कराएं तो कोचिंग शुरू की जाएगी।सवाल यह है कि इसके लिए प्रयास कॉलेजों को करना है या फिर अधिकारियों को?
सलोरी में एनडीए-सीडीएस की नहीं शुरू हो पाईं कक्षाएं
समाज कल्याण विभाग ने सलोरी में डॉ. आंबेडकर छात्रावास व स्कूल में भी एनडीए-सीडीएस की कोचिंग का निर्णय लिया था। 15 छात्रों ने पंजीकरण भी कराया, लेकिन सूरतेहाल देखकर फिर नहीं लौटे। अफसरों की दलील है कि इसी कारण कक्षाएं शुरू नहीं हो पाईं। फिर, राजकीय इंटर कॉलेज में सिविल सर्विसेज की तैयारी कराने के कारण आंबेडकर छात्रावास में इसकी कक्षाएं भी शुरू नहीं की गईं। अभ्युदय योजना के अंतर्गत रेलवे, बैंक, कर्मचारी चयन आयोग समेत अन्य संस्थाओं की भर्तियों की तैयारी कराने की भी योजना थी, लेकिन शिक्षकों की भर्ती ही नहीं हो पाई।
बगैर नोट्स के कराई जा रही पढ़ाई
अभ्युदय कोचिंग में चयनित होने का श्रेय अधिकारी भले ही लें, हकीकत यह है कि यहां किसी को कोई नोट्स तक नहीं दिए जा रहे। ऐसे में देशभर के प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थानों से तैयारी करने लाखों विद्यार्थियों से अभ्युदय के प्रतियोगी कितना मुकाबला कर पाएंगे, समझना कतई कठिन नहीं। हालांकि, नियमानुसार पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराया जाना चाहिए। मगर, यह हो तो तब मिले। बताते हैं कि अब एक प्रतिष्ठित संस्थान से जेईई व नीट की प्रवेश परीक्षा के लिए पाठ्य सामग्री जुटाने की बात शासन स्तर पर चल रही है। अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के बारे में अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
14 शिक्षकों का है पैनल
अभ्युदय कोचिंग में कुल 14 शिक्षकों का पैनल है। इनमें आठ सिविल सर्विसेज के विभिन्न विषयों को पढ़ाते हैं। नीट और जेईई के लिए चार अध्यापक हैं। एनडीए-सीडीएस के भी दो शिक्षक हैंं, लेकिन इन भर्तियों की तैयारी नहीं कराई जा रही है।
पिछले वर्ष 10 का हुआ था चयन
अभ्युदय कोचिंग से तैयारी करने वाले 10 प्रतियोगियों का पिछले वर्ष अलग-अलग पदों पर चयन हुआ था। इनमें राज सोनकर का पुलिस उपाधीक्षक, अभिषेक कुमार भारती का सहायक उद्यान निरीक्षक, सौरभ गुप्ता का पूर्ति निरीक्षक, मंदाकिनी और पंकज का सहायक समीक्षा अधिकारी, अभिजीत त्रिपाठी और विवेकानंद का उप निरीक्षक व योगेंद्र कुमार का पीजीटी के पद पर चयन हुआ है। अमन त्यागी और नीतेश कुमार ने नीट उत्तीर्ण कर मेडिकल कॉलेज में दाखिला पाया है।
विषय विशेषज्ञों के चयन के लिए साक्षात्कार हो चुका है। चयन समिति की संस्तुति पर सूची भी तैयार कर ली गई है। सीडीओ के हस्ताक्षर होने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। एक अक्तूबर से आश्रम पद्धति विद्यालयों में जेईई व नीट की कक्षाएं शुरू हो जाने की उम्मीद है। कॉलेज प्रबंधन यदि परिसर और छात्र-छात्राएं उपलब्ध कराएं तो ग्रामीण क्षेत्रों में सिविल सर्विसेज की भी कक्षाएं शुरू की जाएंगी। - डॉ. प्रज्ञा पांडेय, जिला समाज कल्याण अधिकारी