सावन में दशाश्वमेधेश्वर महादेव के अभिषेक और पूजन का फल सौ यज्ञों के बराबर मिलता है। इस मंदिर के पुजारी पं. सोम शास्त्री बताते हैं कि दशाश्वमेध में पांच यज्ञ का फल पांच सौ यज्ञ के बराबर है। स्नान, तर्पण, दान, होम, स्वाध्याय और जप श्रद्धापूर्वक किया जाए तो असंख्य पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
दशाश्वमेधिके तीर्थे पंचयज्ञान्करोति य:/पंचाश्वमेधजं पुण्यं प्राप्नोत्येवन संशय:। पद्मपुराण के इस श्लोक में दारागंज में गंगा तट पर स्थित दशाश्वमेधेश्वर महादेव की महिमा गाई गई है। इसका अर्थ है कि सृष्टि की रचना के बाद ब्रह्मा ने इसी स्थान पर सबसे पहले 10 अश्वमेध यज्ञ किए थे। इसी कारण यह तीर्थ दशाश्वमेध के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
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सावन में दशाश्वमेधेश्वर महादेव के अभिषेक और पूजन का फल सौ यज्ञों के बराबर मिलता है। इस मंदिर के पुजारी पं. सोम शास्त्री बताते हैं कि दशाश्वमेध में पांच यज्ञ का फल पांच सौ यज्ञ के बराबर है। स्नान, तर्पण, दान, होम, स्वाध्याय और जप श्रद्धापूर्वक किया जाए तो असंख्य पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
औरंगजेब ने इस तीर्थ की महिमा सुनने के बाद यहां आक्रमण कर दिया था। वह बताते हैं कि औरंगजेब ने तलवार से दशाश्वमेधेश्वर महादेव के शिवलिंग पर प्रहार कर दिया। इससे शिवलिंग के ऊपरी हिस्से में आज भी दरार देखी जा सकती है। लेकिन औरंगजेब की तलवार भी दशाश्वमेधेश्वर महादेव को खंडित नहीं कर सकी। अंतत: वापस होना पड़ा।