शिशु को गोद लेने की स्वतंत्रता
शिशु के स्वस्थ होने पर उसे तत्काल नजदीकी राजकीय मान्यता प्राप्त शिशु गृह में भेज दिया जाएगा। जिला बाल कल्याण समिति द्वारा शिशु को आवश्यकतानुसार गोद लेने के लिए विधिक रुप से स्वतंत्र घोषित किया जाएगा। यह कार्रवाई केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण द्वारा की जाएगी। जिला न्यायालय द्वारा उस शिशु को दत्तक ग्रहण के माध्यम से पुनर्वास कर दिया जाएगा।
आश्रय पालना स्थल के लाभ
1. समस्त अनचाहे नवजात शिशु को जीने का अधिकार प्राप्त हो सकेगा।
2. इच्छुक दंपती इन मासूम को विधि अनुरूप गोद ले कर अपना परिवार पूरा कर सकेंगे।
3. हर मासूम को स्वस्थ, सुरक्षित एवं खुशनुमा माहौल में स्नेह व सम्मान के साथ विकसित होने का अवसर प्राप्त हो सकेगा।
4. अच्छी परवरिश से आने वाले कल यह मासूम समाज एवं राष्ट्र के लिए अमूल्य संपत्ति बन सकेंगे।
अनजाहे नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा को लेकर एसआरएन में बाल रोग विशेषज्ञों की टीम उसका स्वास्थ्य का परीक्षण करेगी। - डॉ. एसपी सिंह, प्राचार्य, मोती लाल नेहरू मेडिकल कालेज
जीवन संरक्षण अभियान के तहत प्रदेश में इन आश्रय पालना स्थलों की स्थापना की जा रही है। पिछले एक साल में 29 अनचाहे शिशुओं को विभिन्न स्थानों पर छोड़ा गया है। यह सभी बेटियां हैं। - गुरु देवेंद्र अग्रवाल, योग गुरू, महेशाश्रम, मां भगवती विकास संस्थान उपदयपुर, राजस्थान।