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अंधविश्वास का मामला : पांच दिन शव के साथ रहने वाले परिजनों की नहीं बदली मनोदशा, जानें अस्पताल से छूटने के बाद क्या बोले...

Tue, 05 Jul 2022 01:45 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

बीते मंगलवार को डीहा गांव निवासी अभयराज यादव की बेटी अंतिमा का शव घर में पांच दिनों तक रखकर झांड फूंक करने का मामला सामने आया था। घर से दुर्गंध उठने पर ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस पहुंची तो अंधविश्वास की यह कहानी सामने आई।
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Prayagraj News : एसआरएन से छुट्टी मिलने बाद पैदल घर जाते अभयराज के परिजन। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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बेटी की मौत के बाद उसके शव के साथ पांच दिनों तक घर में बंद रहने वाले परिवार के सभी सदस्यों को सोमवार को एसआरएन अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। लेकिन अंधविश्वास के मकड़जाल में फंसे सभी चार सदस्यों की मनोदशा नहीं बदली है। घर लौटते वक्त रास्ते में जब उनके रिश्तेदार उनसे मिले तो उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि देवी मां ने बुलाया है। पूजा-पाठ से सब ठीक हो जाएगा। दूसरी ओर रिश्तेदारों अस्पताल प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। कहा है कि उनको डिस्चार्ज की सूचना तक नहीं दी गई। अगर परिवार के सदस्यों की मानसिक दशा अभी ठीक नहीं है तो फिर उनको डिस्चार्ज क्यों किया गया। उनकी किसी मनोचिकित्सक से काउंसिल क्यों नहीं कराई गई।

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बीते मंगलवार को डीहा गांव निवासी अभयराज यादव की बेटी अंतिमा का शव घर में पांच दिनों तक रखकर झांड फूंक करने का मामला सामने आया था। घर से दुर्गंध उठने पर ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस पहुंची तो अंधविश्वास की यह कहानी सामने आई। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा दिया और घर में मौजूद अभयराज की तीन बेटियों, तीन बेटों व पांच नाती-पोतों को एसआरएन अस्पताल में भर्ती करा दिया।

सभी खाना न मिलने से बेहद कमजोर हो गए थे। बच्चे तो कुपोषण का शिकार बन गए थे। परिवार के लोग भूख लगने पर गंगाजल पीते थे। इसमें दो बेटियों और नाती-पोतों को जरूरी दवाएं देकर अगले ही दिन डिस्चार्ज कर दिया गया। बेटियां बच्चों के साथ ससुराल चली गईं। बाकी का इलाज चल रहा था। 


सोमवार को अभयराज के तीनों बेटों आर्यन, मानसिंह, ज्ञान सिंह व बेटी बीनू को भी डिस्चार्ज कर दिया गया। अभयराज के साले का लड़का उमाशंकर जब अस्पताल पहुंचा तो उसे इसकी जानकारी हुई। उमाशंकर के मुताबिक परिजनों व रिश्तेदारों को जानकारी दिए बिना ही उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद चोरों अस्पताल से पैदल ही डीहा गांव स्थित अपने घर की ओर निकल पड़े।ई दिए।

रिश्तेदारों ने उनकी तलाश की तो वह उन्हें सरस्वती हाईटेक सिटी के पास मिल गए। लेकिन रिश्तेदारों को देखकर वह नाराज हो गए। कहा कि देवी मां ने बुलाया है, घर जा रहे हैं। उनकी पूजा पाठ से ही सब ठीक हो जाएगा। उमाशंकर ने इसकी जानकारी ग्राम प्रधान प्रतिनिधि दूधनाथ यादव को दी तो उन्होंने लेखपाल व कानूनगो को इसकी सूचना दी। बेंदो टोल बूथ के पास कानूनगो कमला प्रसाद पांडेय और लेखपाल कैलाश शर्मा भी पहुंचे। उन्होंने चारों को वहां रोकर नाश्ता पानी कराया और मदद के रूप में पांच सौ रुपये भी दिए। इसके बाद फिर वह सभी पैदल ही निकल पड़े। टोल प्लाज पर ठहरने के दौरान उन्होंने कहा कि अस्पताल में चिकित्सकों ने उनकी ठीक से देखभाल की है।  
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मंगलवार से ही बंद पड़ा है अभयराज का घर
करीब एक सप्ताह पहले बेटी अंतिमा का शव घर से निकालने के बाद परिवार के सदस्यों को प्रशासन द्वारा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद से ही अभयराज का मकान बंद है। अभयराज ने भी घर छोड़ दिया है। लेकिन अभी तक उसके घर को सैनेटाइज नहीं कराया गया है। अभयराज के तीनों बेटे व एक बेटी सोमवार को फिर से डीहा गांव स्थित अपने बंद मकान में पहुंचे हैं। उनके लौटने की सूचना पर आसपास के लोगों में अजीब सी दहशत दिखाई दी। उनकी मनोदशा को देखते हुए ग्रामीण आशंकित दिखा
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