सभी खाना न मिलने से बेहद कमजोर हो गए थे। बच्चे तो कुपोषण का शिकार बन गए थे। परिवार के लोग भूख लगने पर गंगाजल पीते थे। इसमें दो बेटियों और नाती-पोतों को जरूरी दवाएं देकर अगले ही दिन डिस्चार्ज कर दिया गया। बेटियां बच्चों के साथ ससुराल चली गईं। बाकी का इलाज चल रहा था।
सोमवार को अभयराज के तीनों बेटों आर्यन, मानसिंह, ज्ञान सिंह व बेटी बीनू को भी डिस्चार्ज कर दिया गया। अभयराज के साले का लड़का उमाशंकर जब अस्पताल पहुंचा तो उसे इसकी जानकारी हुई। उमाशंकर के मुताबिक परिजनों व रिश्तेदारों को जानकारी दिए बिना ही उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद चोरों अस्पताल से पैदल ही डीहा गांव स्थित अपने घर की ओर निकल पड़े।ई दिए।
रिश्तेदारों ने उनकी तलाश की तो वह उन्हें सरस्वती हाईटेक सिटी के पास मिल गए। लेकिन रिश्तेदारों को देखकर वह नाराज हो गए। कहा कि देवी मां ने बुलाया है, घर जा रहे हैं। उनकी पूजा पाठ से ही सब ठीक हो जाएगा। उमाशंकर ने इसकी जानकारी ग्राम प्रधान प्रतिनिधि दूधनाथ यादव को दी तो उन्होंने लेखपाल व कानूनगो को इसकी सूचना दी। बेंदो टोल बूथ के पास कानूनगो कमला प्रसाद पांडेय और लेखपाल कैलाश शर्मा भी पहुंचे। उन्होंने चारों को वहां रोकर नाश्ता पानी कराया और मदद के रूप में पांच सौ रुपये भी दिए। इसके बाद फिर वह सभी पैदल ही निकल पड़े। टोल प्लाज पर ठहरने के दौरान उन्होंने कहा कि अस्पताल में चिकित्सकों ने उनकी ठीक से देखभाल की है।
मंगलवार से ही बंद पड़ा है अभयराज का घर
करीब एक सप्ताह पहले बेटी अंतिमा का शव घर से निकालने के बाद परिवार के सदस्यों को प्रशासन द्वारा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद से ही अभयराज का मकान बंद है। अभयराज ने भी घर छोड़ दिया है। लेकिन अभी तक उसके घर को सैनेटाइज नहीं कराया गया है। अभयराज के तीनों बेटे व एक बेटी सोमवार को फिर से डीहा गांव स्थित अपने बंद मकान में पहुंचे हैं। उनके लौटने की सूचना पर आसपास के लोगों में अजीब सी दहशत दिखाई दी। उनकी मनोदशा को देखते हुए ग्रामीण आशंकित दिखा