इलाहाबाद। सिविल लाइंस बस अड्डे के सामने यात्रियों को उठाकर निजी वाहन संचालक रोडवेज को हर महीने एक करोड़ रुपये की चोट दे रहे हैं। इसकी रोकथाम के लिए रोडवेज के अफसर कमिश्नर, डीएम, एसएसपी और आरटीओ का चक्कर काट रहे हैं। मुख्य सचिव के आदेश देख सभी चिट्ठी लिखकर रोक का भरोसा भी दे रहे हैं। रोडवेज अफसरों ने जांच कर खुलासा किया है कि रोजाना 175 छोटे-बड़े वाहन बस अड्डे के बाहर से यात्रियों को उठा रहे हैं। क्षेत्र में यह संख्या 1792 वाहनों की है। एमडी के निर्देश पर डग्गामार वाहनों की वीडियोग्राफी भी कराई गई है लेकिन पुलिस हाथ नहीं रखने दे रही है।
निजी सवारी वाहनों को रोडवेज के बस अड्डों से एक किमी दूर रखने का आदेश पुराना है लेकिन अमल कभी नहीं हुआ। 28 नवंबर 2013 को निवर्तमान मुख्य सचिव ने दुबारा इसकी याद कराई तो रोडवेज के प्रबंध निदेशक ने क्षेत्रीय प्रबंधकों को स्थानीय प्रशासन की मदद लेकर नुकसान बचाने को कहा। मुख्य सचिव की चिट्ठी डीएम और एसएसपी को भी गई। स्थानीय रोडवेज अफसर कमिश्नर बादल चटर्जी के पास पहुंचे तो उन्होंने एसएसपी कार्यालय भेज दिया। फिर, एडीएम सिटी और आरटीओ में भी भागदौड़ हो गई लेकिन नतीजा सिफर है। रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक रामजीत वर्मा कहते हैं कि निजी सवारी वाहन सिविल लाइंस बस अड्डे के अंदर घुसकर सवारियों को पकड़ रहे हैं। रोजाना तीन लाख रुपये की चोट पहुंच रही है। पूरे क्षेत्र से सातों बस अड्डों पर होने वाले इस नुकसान का आकलन पांच लाख रुपये तक का है।
सिविल लाइंस बस अड्डे के मुख्य गेट के बगल पुलिस सहायता केंद्र बना है। यहां दो पुलिस कर्मियों की तैनाती रहती है। इनका काम निजी वाहनों को रोकना और जाम से छुटकारा दिलाने का है लेकिन पूरे दिन निजी वाहन चालक या उनके मालिक केंद्र पर मंडराते रहते हैं। सवारियां भरने के बाद सिपाहियों की मुट्ठी गरम किए बिना वह हिल नहीं सकते। रोडवेज अफसर हर सप्ताह केंद्र के सिपाहियों की ड्यूटी बदलने की मांग भी उठा रहे हैं, जिससे उनकी सेटिंग न हो सके।