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शिक्षक ही दक्ष नहीं तो कैसे बढ़े पढ़ाई की गुणवत्ता

Mon, 23 Sep 2013 05:36 AM IST
Allahabad
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इलाहाबाद। सुस्त कार्यशैली के कारण इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कई विभागों में सैकड़ों फाइलें वर्षों से लंबित तो हैं ही, शैक्षिक गतिविधियां तथा गुणवत्ता भी इसकी चपेट में है। आलम यह है कि शिक्षकों को शिक्षा की नवीनतम प्रणालि से अवगत करने के लिए मानक के अनुसार पुनश्चर्या कार्यक्रम तक आयोजित नहीं हो पाए। जो कार्यक्रम हुए उनमें भी उपस्थिति बहुत कम रही।
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विश्वविद्यालय में 1987 में स्थापित शैक्षणिक स्टाफ कालेज की ओर से समय-समय पर हर विषय पर पुनश्चर्या कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। हर शिक्षक के लिए जरूरी है कि वह तीन से पांच वर्ष में एक बार इसमें अवश्य शामिल हो लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में हर स्तर पर फेल रहा। शैक्षणिक स्टाफ कालेज की ओर से नियंत्रक महालेखापरीक्षक को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार 2012 तक विगत छह वर्षों में 116 पुनश्चर्या कार्यक्रम आयोजित होने थे लेकिन मात्र 87 कार्यक्रम हो पाए। खास यह कि आयोजन के प्रतिशत में इस दौरान 17 से 32 तक गिरावट हुई। कैग की रिपोर्ट देखें तो कई विभाग पुनश्चर्या कार्यक्रम आयोजित करने में ही असमर्थ हैं। इसके अलावा हास्टलों में इसके लिए सुविधा नहीं है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में कमी के लिए इन्हें ही मुख्य कारण बताया जा रहा है। इतना ही नहीं शोध की गुणवत्ता की जांच के लिए आंतरिक गुणात्मक आश्वासन प्रकोष्ठ का गठन भी लंबे समय तक लटका रहा। परिसर में गिरते शैक्षिक माहौल तथा शोध नहीं होने के पीछे इसे प्रमुख कारण माना जा रहा है। कैग ने इस पर आपत्ति जताते हुए सुधार के लिए कदम उठाने का सुझाव दिया है।
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