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प्रवेश के लिए ग्लोबलाइजेशन डिपार्टमेंट में बंदी

Thu, 12 Sep 2013 05:35 AM IST
Allahabad
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ग्लोबलाइजेशन विभाग में परास्नातक में प्रवेश नहीं किए जाने से नाराज छात्रों ने बुधवार को दूसरे दिन भी विभाग में कोई काम नहीं होने दिया। नाराज छात्रों ने चीफ प्रॉक्टर कार्यालय के भी सभी काउंटर बंद करा दिए। उन्होंने परिसर में जुलूस निकाला। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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क्लास रूम न होने की बात करते हुए विभागाध्यक्ष ने पीजी कोर्स में प्रवेश करने से मना कर दिया है। उनका कहना है कि जब क्लास के लिए जगह ही नहीं है तो प्रवेश किस आधार पर लिया जाए। इससे विश्वविद्यालय के अफसरों के सामने तो समस्या खड़ी हो ही गई है, छात्रों में भी नाराजगी है। प्रवेश परीक्षा में सफल छात्रों का भविष्य भी अधर में लटक गया है। इसको लेकर छात्र जुलूस की शक्ल में विभाग पहुंचे लेकिन अध्यक्ष नहीं मिले। इससे नाराज छात्रों ने वहां सभी काम ठप करा दिए। इसके बाद वे चीफ प्रॉक्टर कार्यालय पहुंचे और वहां भी काउंटर बंद करा दिए। छात्रों ने डीएसडब्ल्यू को ज्ञापन भी सौंपा।
स्नातक पाठ्यक्रम में एक छात्र को प्रवेश दिए जाने के बावजूद नामांकन नहीं करने को लेकर भी उनमें नाराजगी रही। छात्र पहले से बीकाम है, जबकि विश्वविद्यालय केनियमानुसार दोबारा स्नातक की अनुमति नहीं है। शिक्षकों का कहना है कि छात्र ने यह तथ्य छिपा रखा था। बाद में पता चलने पर नामांकन रोक दिया गया। डीएसडब्ल्यू डॉ. एआर सिद्दीकी का कहना है कि विभागाध्यक्ष से बात की जा रही है कि पीजी में प्रवेश प्रक्रिया शुरू करें। कक्षाओं का इंतजाम जल्द किया जाएगा।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय और कालेजों में क्लास रूम को लेकर स्थिति भयावह होती जा रही है। इसके पीछे विश्वविद्यालय प्रशासन खुद जिम्मेदार है। विश्वविद्यालय में सेंट्रल लाइब्रेरी के सामने भवन बनकर तैयार है लेकिन विवादों के कारण पड़ा है। वहां स्नातक की कक्षाओं के साथ प्रशासनिक कार्यालय भी स्थानांतरित होने हैं। विज्ञान संकाय में भी ऐसे ही एक भवन के लिए वर्षों पहले पैसा मिल गया था लेकिन प्रक्रिया ही नहीं शुरू हो पायी। इसकी वजह से इस मद में मिले करोड़ों रुपये वापस हो गए। अब नए सिरे से फिर पैसा रिलीज हुआ है लेकिन अब भी विश्वविद्यालय प्रशासन चेता नहीं है। उसी रफ्तार से काम हो रहा है। आलम यह है कि बार-बार तारीख घोषित करने के बावजूद भूमि पूजन तक नहीं हो पाया है। इन लापरवाहियों का नतीजा यह है कि बीएससी प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को लैब देखने को भी नहीं मिलती। प्रायोगिक कक्षाओं के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जाती है। कालेजों में स्थिति और बदतर है। सीएमपी और इलाहाबाद डिग्री कालेज में क्लास रूम तथा लैब के लिए लगातार आंदोलन जारी है। इसको लेकर दानों परिसर में कई बार तालाबंदी भी हुई लेकिन वहां विकास कार्य पूरी तरह से ठप है।
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