इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश के मेडिकल कालेजों में शासनादेशों को नजरअंदाज कर आरक्षित वर्ग के मेडिकल छात्रों से मनमानी फीस वसूली और 2010 के मध्य सत्र में फीस वृद्धि के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने तीन सप्ताह में शासन से जवाब मांगा है। साथ ही सत्र 2010 के परास्नातक छात्रों को आगामी परीक्षा औपबंधिक रूप से शामिल होने की छूट दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुशील हरकौली और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने एसएल मेडिकल कालेज आगरा के डॉक्टर राकेश कुमार पासवान की विशेष अपील की सुनवाई करते हुए दिया है।
अपीलार्थी के अधिवक्ता हीरालाल यादव, प्रभाकर सिन्हा और सुनील कुमार ने कहा कि वर्ष 2010 में प्रवेश के वक्त 11 जुलाई 2001 का शासनादेश लागू था। इसके मुताबिक आरक्षित वर्ग को प्रशिक्षण और शिक्षण शुल्क में पचास प्रतिशत की छूट दी जानी थी मगर पूरी फीस वसूली गई। दूसरी ओर प्रवेश के चार माह बाद 20 अगस्त 2010 को शासनादेश लागू कर मध्य सत्र में बेतहाशा फीस वृद्धि कर दी जो अवैधानिक है। क्योंकि शुल्क के संदर्भ में शासनादेशों का पश्चातवर्ती प्रभाव नहीं हो सकता है। इसीलिए मध्य सत्र में आए नए शासनादेश के मुताबिक फीस जमा करने के लिए 2010 के छात्र बाध्य नहीं है। साथ ही 2001 के शासनादेश के मुताबिक आरक्षित वर्ग के छात्रों से वसूला गया अधिक शुल्क वापस किया जाना चाहिए।