इलाहाबाद। सड़कों पर आने वाले दिनों में ट्रेवल एजेंसियों और निजी ट्रांसपोर्टरों की गाड़ियां लाल, काला और मैरून रंगों में नहीं दिखेगी। परिवहन विभाग ने ऐसी गाड़ियों के लिए कलर कोड जारी कर दिया है। आरटीओ नरेंद्र राय का कहना है कि ट्रेवल एजेंसी संचालकों को कलर कोड के मुताबिक गाड़ियों का रंग किसी भी सूरत में बदलना ही होगा।
उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली-1998 में संसोधित किए गए प्रावधानों के मुताबिक अब गाड़ियों को लाल, काला और मैरून रंगाें में नहीं रंगा जा सकेगा। गाड़ियों के दोनों तरफ फ्लोरोसेंट रिबन लगाना होगा। बसों में फ्लोरोसेंट रिबन की चौड़ाई पांच सेंटीमीटर होगी। इतना ही नही बस जैसी बड़ी गाड़ियाें के बीचोबीच 60 सेंटीमीटर व्यास में एक गोला बनाकर उसमें ठेका गाड़ियां लिखवाना अनिवार्य होगा, जबकि टैक्सी जैसी गाड़ियों के लिए गोले का व्यास 25 सेंटीमीटर होगा।
आरटीओ नरेंद्र राय का कहना है कि नया कलर कोड लागू करने का उद्देश्य अनाधिकृत तरीके से संचालित होने वाली गाड़ियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करना है। सभी ट्रेेवल एजेंसियों को 31 मार्च तक निर्धारित कलर कोड के मुताबिक गाड़ियों का रंग करवाना होगा। अन्यथा परमिट की धाराओं के तहत कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।