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स्लैब बढ़ता तो हर कर्मचारी को होता फायदा

Sat, 02 Mar 2013 05:30 AM IST
Allahabad
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इलाहाबाद। दो से पांच लाख रुपए की आय पर टैक्स में दो हजार रुपए की छूट देकर सरकार ने कर्मचारियों के सिर्फ एक वर्ग को लाभ दिया। अगर इस छूट के बजाय स्लैब रेट में बढ़ोतरी की गई होती तो सरकारी एवं निजी सेक्टर के हर वर्ग के कर्मचारियों को इसका लाभ मिलता लेकिन पांच लाख से अधिक आय वाले कर्मचारियों को बजट से ढेला भी नहीं मिला।
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दरअसल, आंकड़ों को ही गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। लोगों को बताया जा रहा कि पहले दो लाख रुपए की आय पर कोई टैक्स नहीं था और अब दो लाख 20 हजार रुपए पर आयकर कटौती नहीं की जाएगी लेकिन इस तथ्य को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। सिर्फ दो लाख रुपए ही आयकर कटौती के दायरे से अलग रखे गए हैं। सरकार ने स्लैब रेट में तो कोई परिवर्तन किया ही नहीं। दो से पांच लाख रुपए की आय पर दो हजार रुपए की छूट दी जा रही है। अगर आय बढ़कर दो लाख 20 हजार रुपए होती है तो दो लाख पर पहले से ही छूट है और 20 हजार पर दो हजार या यानी दस फीसदी रकम भी आयकर कटौती से मुक्त रखी गई है। ऐसे में दो लाख 20 हजार रुपए की आय पर कोई टैक्स देय नहीं होगा लेकिन आय बढ़कर दो लाख तीस हजार रुपए हुई तो अतिरिक्त 10 हजार रुपए पर दो हजार की छूट मिलने के बाद बचे आठ हजार रुपए पर दस फीसदी की दर से आठ सौ रुपए टैक्स भरना होगा। ऐसे में जैसे-जैसे वेतन की राशि बढ़ेगी, आयकर भी और अधिक देना होगा। यदि स्लैब को बढ़ाकर दो लाख 20 हजार रुपए कर दिया गया होता तो पांच लाख से अधिक आय वालों को भी इसका सीधा लाभ मिलता और उन्हें दो लाख के बजाय सीधे दो लाख 20 हजार रुपए की आय पर टैक्स कटौती से राहत मिल जाती। कर एवं वित्त सलाहकार पवन जायसवाल ने बताया कि आंकड़ों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है। सरकारी और निजी सेक्टर के ज्यादातर कर्मचारियों के लिए बजट में कुछ नहीं है। इन दिनों सरकारी और प्राइवेट सेक्टर में प्रतिमाह 50 हजार रुपए वेतन आम हो गया है। ऐसे में सालाना आय छह लाख होती है और नए बजट के अनुसार पांच लाख रुपए से अधिक आय वालों को दो हजार रुपए तो दूर, किसी तरह की राहत प्रदान नहीं की गई है। उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष हनुमान प्रसाद श्रीवास्तव का कहना है कि बजट में कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग की पूरी तरह से अनदेखी की गई है।
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