नई पेंशन स्कीम (अंशदायी पेंशन योजना) के तहत नियुक्त केंद्रीय एवं राज्य कर्मचारियों को इस बजट में ढेला भी नहीं मिला। उन्हें उम्मीद थी कि पेंशन फंड के लिए होने वाली कटौती को आयकर से मुक्त रखा जाएगा लेकिन बजट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया गया।
अंशदायी पेंशन योजना के तहत नियुक्त कर्मचारियों के वेतन से भविष्य निधि के लिए कटौती भी बंद कर दी गई है। ऐसे में वेतन की रकम और अधिक हो गई है, जिसकी वजह से कर्मचारियों को ज्यादा आयकर अदा करना पड़ रहा है और महंगाई में बचत कर पाना मुश्किल हो जाएगा।
अंशदायी पेंशन योजना के तहत नियुक्त कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि की सुविधा नहीं है। जब भविष्य निधि को ही समाप्त कर दिया गया तो उस पर आयकर कटौती से राहत मिलने का कोई सवाल ही नहीं उठता। ऐसे कर्मचारियों को अब भविष्य निधि के बजाय अपने पेंशन फंड के लिए वेतन से कटौती करानी पड़ रही है।
पेंशन फंड में जमा सालाना आय की अधिकतम दस फीसदी रकम को ही आयकर कटौती से मुक्त रखा गया है, जो भविष्य निधि बचत के मुकाबले काफी कम है। भविष्य निधि खाते में सालाना एक एक लाख रुपए तक की आय पर टैक्स कटौती से छूट मिलती है।
डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन आईटीआई के प्रांतीय उपाध्यक्ष संजीव कुमार राय का कहना है कि बजट से सबसे ज्यादा नुकसान नए कर्मचारियों को हुआ है। उन्हें एक रुपया का लाभ नहीं मिला जबकि साल में दो बार डीए बढ़ना है और तीन फीसदी सालाना इंक्रीमेंट भी मिलना है। ऐसे में समय के साथ वेतन की रकम बढ़ेगी और नए कर्मचारियों को पहले के मुकाबले ज्यादा टैक्स भरना होगा।