हाईकोर्ट ने किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि किसानों की जमीनें सर्किल रेट से कम पर न बेची जाएं। जमीन बेचने से पूर्व इसका व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार किया जाए ताकि अधिक से अधिक लोग नीलामी प्रक्रिया में भाग ले सके ।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि आदेश का पालन न करने वाले जिलाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए साथ ही नीलामी की समस्त प्रक्रिया रद मानी जाएगी। दोषी अधिकारी के खिलाफ अवमानना का केस भी चलेगा।
न्यायमूर्ति सभाजीत यादव ने बरेली के रामभरोसे की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मौजूद जमींदारी विनाश एवं भूमि सुधार अधिनियम में किसानों की भूमि की नीलामी को लेकर कई कमियां हैं। इसलिए यह आदेश जारी करने की आवश्यकता पड़ रही है। यह आदेश पूरे उत्तर प्रदेश में तबतक प्रभावी रहेगा जबतक कि सरकार अधिनियम में युक्तियुक्त संशोधन नहीं कर लेती है।
कोर्ट ने कहा कि जिलाधिकारी नीलामी प्रक्रिया प्रारंभ करने से पूर्व उसका व्यापक रूप से प्रचार प्रसार कर लें। भूमि का मूल्यांकन ‘वैल्यूअर’ से कराया जाय। यदि वैल्यूअर सर्किट रेट से मूल्य आंकता है तो नीलामी सर्किल रेट से ही प्रारंभ होगी मूल्यांकन से नहीं। रामभरोसे ने मंडलायुक्त और बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें जिलाधिकारी द्वारा अपनाई गई नीलामी प्रक्रिया को सही करार दिया गया था।