इलाहाबाद। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की मंशा सफल हुई तो युवकों को प्रशिक्षण के अभाव में मनचाही नौकरी नहीं गवानी पड़ेगी। आयोग ने क्षेत्रीयता को ध्यान में रखकर बड़े स्तर पर रोजगारपरक कोर्स शुरू करने का फैसला लिया है। इस मकसद से इसे ‘राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान’ में भी शामिल किया जाएगा। इसके लिए शिक्षण संस्थानों के अलावा उद्योग घरानों से भी सुझाव मांगा गया है।
रोजगार को लेकर गंभीर यूजीसी ‘वोकेशनल कोर्सेज’ के लिए पहल करके पहले ही इसकी मंशा जता चुका है। इसके तहत पारंपरिक तथा साहित्यिक विषयों में भी डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्सेज शुरू होंगे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एकेडमिक काउंसिल में फैसले के बाद इसके लिए पहल भी हो चुकी है। अब इसे और विस्तार देने की तैयारी है। प्राथमिक और माध्यमिक की तरह उच्च शिक्षा में पंजीकरण संख्या बढ़ाने के लिए भी आयोग ने अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इसका फार्मेट भी ऑनलाइन कर दिया गया है। इसमें आयोग ने नए तरह के व्यवसायिक पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। इतना ही नहीं बीटेक, बीसीए, एमबीए आदि में भी नए विषय शामिल किए जा सकते हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि पाठ्यक्रम क्षेत्र और उद्योग की जरूरतों को देखकर तैयार किए जाएं। इसी को ध्यान में रखकर यूजीसी ने शिक्षण संस्थानों के साथ उद्योग घरानों से भी इस संबंध में सुझाव और प्रस्ताव मांगे हैं।