इलाहाबाद। उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) से 500 मीटर दूर तक किसी भी तरह के निर्माण पर रोक है। बावजूद इसके इलाहाबाद विकास प्राधिकरण (एडीए) ने इसके दायरे में ग्रुप हाउसिंग को अनुमति देने की तैयारी कर ली है। ग्रुप हाउसिंग के लिए मानचित्र दाखिल होने पर गणना के बाद डिमांड नोट जारी किया गया, जिस पर तकरीबन 42 लाख रुपए भी जमा करा लिए गए। ग्रुप हाउसिंग के लिए बगल से जा रहे नाले की जमीन की हथिया ली गई। मजे की बात यह कि मानचित्र अभी जारी भी नहीं हुआ लेकिन मौके पर पिलर का निर्माण शुरू हो गया। एडीए उपाध्यक्ष अजय कुमार सिंह का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। हो सकता है नक्शा एचएफएल के संबंध में आदेश जारी होने के पहले दाखिल किया गया हो। न्यायालय ने एचएफएल के तहत साफ-साफ निर्देश दिया था कि अब इस दायरे में कोई नया निर्माण नहीं होगा। भले ही उसका नक्शा पूर्व में स्वीकृत हुआ हो। एडीए इस तथ्य की कैसे अनदेखी कर रहा है, यह समझ से परे है।
मिंटो रोड पर ब्वायज हाई स्कूल के पीछे एक ग्रुप हाउसिंग की तैयारी हो रही है। यह क्षेत्र एचएफएल से 500 मीटर के दायरे में आता है। 1978 की बाढ़ में यह क्षेत्र भी पानी में डूब गया था। एचएफएल से 500 मीटर दूर तक के इलाकों को चिह्नित कर पत्थर भी लगाए गए हैं। इसमें कलक्ट्रेट, विकास भवन, म्योहाल चौराहा, पुलिस लाइन, एसबीआई मुख्य शाखा के सामने, मिंटो रोड भी शामिल है लेकिन एडीए अफसरों ने रोक के आदेश को किनारे करते हुए ग्रुप हाउसिंग के नक्शे को स्वीकृत करने की प्रक्रिया भी पूरी कर डाली। सूत्रों की मानें तो यहां से गुजर रहे बडे़ से नाले की तकरीबन 12 फीट जमीन भी ग्रुप हाउसिंग में शामिल कर ली गई और नगर निगम से एनओसी लेने के लिए जो नक्शा लगाया गया, नाले की जमीन छिपाने के लिए उसे भी बदल दिया गया। यहां सवाल यह है कि एचएफएल में होने के बावजूद एडीए ने किस आधार पर नक्शा दाखिल कर लिया? फिर उसकी गणना के बाद डिमांड नोट जारी कर रकम भी जमा करा ली। ऐसा इसलिए भी कि एडीए ने ही एचएफएल से 500 मीटर दूर तक पत्थर लगवाए हैं। ऐसे में नक्शा दाखिल होने पर क्षेत्र के सहायक और अवर अभियंता को भी इस पर आपत्ति करनी चाहिए लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।