इलाहाबाद। महाकुंभ शुरू होने में अब 40 दिन शेष हैं लेकिन गंगा में गिरते नालों पर रोक लगाने के लिए गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोई कदम अब तक नहीं उठाए हैं। इकाई की ओर से कराया जा रहा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण अब पूरा नहीं हो सका है। सलोरी एसटीपी भी पूरी क्षमता से नहीं चल रहा है। ऐसे में महाकुंभ के पहले गंगा को स्वच्छ करने की उम्मीद कम दिख रही है।
दारागंज, बघाड़ा, सलोरी, शिवकुटी, रसूलाबाद, राजापुर, द्रौपदी घाट, झूंसी के चार नालों के साथ शहर के तकरीबन 20 बड़े-छोटे नाले सीधे गंगा में गिर रहे हैं। यह स्थिति तब है जब जनवरी में महाकुंभ शुरू होने जा रहा है और साधु-संतों के साथ बड़ी संख्या में समाजसेवी संस्थाएं गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए लगातार आंदोलन कर रही हैं। बावजूद इसके महाकुंभ के पहले गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्य में जरा भी तेजी नहीं दिख रही है।
इकाई की ओर से गंगा किनारे मेहंदौरी में एसटीपी का निर्माण कराया जा रहा है। इन नालों का पानी इस एसटीपी में शोधित करने के बाद गंगा में छोड़ा जाना है। पहले योजना बनाई गई थी कि 60 एमएलडी के इस एसटीपी को महाकुंभ के पहले चालू कर दिया जाएगा लेकिन इसका निर्माण करा रही कंपनी के काम की रफ्तार काफी धीमी है, सो अब तक किया गया है कि महाकुंभ तक 30 एमएलडी पानी को शोधित करने का काम शुरू हो जाएगा। हालांकि यह भी समय से पूरा हो सकेगा, कहना मुश्किल है। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अफसर इस बारे में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
‘गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई को सभी नाले टेप कर एसटीपी तक ले जाना है। इसी सप्ताह नालों का निरीक्षण किया जाएगा। इसके बाद इकाई को नोटिस जारी की जाएगी।’
डॉ.मोहम्मद सिकंदर
क्षेत्रीय अधिकारी
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड