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72825 शिक्षक भर्ती : हाईकोर्ट का आदेश - 12091 चयनित शिक्षकों की नियुक्ति के लिए काउंसलिंग कराए यूपी सरकार

Sat, 13 Jan 2024 01:15 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने विनय कुमार पांडेय, राम प्रसाद विश्वकर्मा समेत कुल 30 याचिकाओं को एक साथ निस्तारित करते हुए यह आदेश दिया है। याची की दलीलों के मुताबिक, उनका चयन 2011 में हो चुका है, लेकिन बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से इन्हें नियुक्ति पत्र आवंटित नहीं किया गया।
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अदालत। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 2011 में 72,825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती में चयनित 12,091 शिक्षकों की नियुक्ति के लिए काउंसलिंग कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद को कहा है कि वह सभी जिलों में 22 से 25 जनवरी के बीच विज्ञापन निकाले और पांच फरवरी के आसपास वाले सप्ताह में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करे।

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न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने विनय कुमार पांडेय, राम प्रसाद विश्वकर्मा समेत कुल 30 याचिकाओं को एक साथ निस्तारित करते हुए यह आदेश दिया है। याची की दलीलों के मुताबिक, उनका चयन 2011 में हो चुका है, लेकिन बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से इन्हें नियुक्ति पत्र आवंटित नहीं किया गया। याचियों ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली, जहां से मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया।

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए बेसिक शिक्षा परिषद से जवाब मांगा था। परिषद ने कहा कि याचीगण काउंसिल में उपस्थित नहीं हुए और इनके कॅटऑफ अंक भी ऊपर नहीं आए। याचियों की ओर से अधिवक्ता आरके ओझा, अशोक खरे, अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी, इंद्रेश दुबे आदि की ओर से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट में परिषद ने नियुक्ति योग्य चयनित शिक्षकों की जो सूची प्रस्तुत की थी, उसमें कॅटऑफ अंक की कोई शर्त नहीं थी। बेसिक शिक्षा परिषद इस पर कोई ठोस जवाब नहीं दे सकी।

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नौ जनवरी से सुरक्षित था फैसला

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद नौ जनवरी को फैसला सुरक्षित कर लिया था। शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने 22 जनवरी से 25 जनवरी 2024 के बीच विज्ञापन निकालकर पांच फरवरी के आसपास कोई निश्चित तिथि तय कर काउंसलिंग कराने का आदेश दिया।

काउंसलिंग में हाजिर न होने संबंधी देना होगा हलफनामा

कोर्ट ने याचियों को इस आशय का हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है कि वह पूर्व की काउंसलिंग में हाजिर नहीं हुए थे। चयनित अभ्यर्थियों को काउंसलिंग फीस के बतौर बेसिक शिक्षा परिषद के समक्ष दो हजार रुपये भी जमा कराने के लिए कहा गया है।

कोर्ट ने कहा-गुरू का दर्जा भगवान से ऊंचा

हाईकोर्ट ने कबीरदास के दोहे का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरू का दर्जा भगवान से भी ऊपर है। याचीगण शिक्षक (गुरू) बनने की श्रेणी में हैं। वह बहुत सम्मानजक पेशे से जुड़ रहे हैं। कोर्ट ने इनकी ओर से दाखिल हलफनामे को इसी गंभीरता के साथ देखा है।
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