जिले में बढ़ रहे संक्रमण के बीच राहत वाली खबर भी है। यहां संक्रमित मरीजों के ठीक होने की दर 70 फीसदी से अधिक पहुंच गई है। प्रयागराज का यह रिकवरी रेट लखनऊ से करीब 14 फीसदी अधिक है। हालांकि, डेथ रेट का आंकड़ा दोगुना है।
प्रयागराज में डेथ रेट साढ़े तीन फीसदी के आसपास है, जबकि लखनऊ में डेढ़ फीसदी के करीब है। 25 जून तक की कोरोना की रिपोर्ट के आधार पर गाजियाबाद में डेथ रेट 4 फीसदी से अधिक, मेरठ में साढ़े आठ फीसदी से अधिक और आगरा में साढ़े नौ फीसदी के आसपास है।
जिले में कोरोना के मरीजों की संख्या ढाई सौ के करीब पहुंच गई है। यहां पहला मामला पांच अप्रैल को सामने आया था। इंडोनेशियाई नागरिक में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। उसके बाद मुंबई से लौटे कोरांव के दो युवकों और तेलियरगंज के एक युवक में संक्रमण की पुष्टि हुई थी।
जिले में पांच अप्रैल से पांच जून तक 123 मरीज संक्रमित मिले। जबकि, करीब 20 दिनों में ही संक्रमित मरीजों की संख्या 242 तक पहुंच गई। मरीजों के बढ़ने के साथ ही रिकवरी रेट भी बढ़ता गया। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में अक तक 169 मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं। जबकि, नौ मरीजों की संक्रमण से मौत हो गई।
प्रदेश में संक्रमण से सबसे अधिक 85 मौतें आगरा में हुईं हैं, मेरठ में 76, गाजियाबाद में 49, नोएडा में 20, लखनऊ में 14 मौतें हुईं हैं। एसआरएन के कोविड-19 के नोडल इंचार्ज डॉ. सुजीत कुमार ने बताया कि प्रयागराज और उसके आसपास के जिलों के आंकड़े के मुताबिक यहां संक्रमण से मौत का प्रतिशत तीन से साढ़े तीन प्रतिशत है।