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61 फर्जी नाम-पते के सहारे प्रयागराज के इस बैंक को लगाया करोड़ों का चूना

Sat, 05 Jan 2019 01:36 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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बैंक फ्रॉड
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बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक की फतेहपुर बिछुआ शाखा से 61 फर्जी नाम-पते और सैलरी स्लिप के सहारे पर्सनल लोन लेकर करोड़ों रुपये डकार लिए गए। इन सभी खातों में तीन से नौ लाख तक की रकम लोन में बांटी गई थी। लंबे समय से किश्तें न आने के बाद बैंक ने जांच कराई तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। बैंक ने फर्जी नाम-पते के आधार पर लोन लेने वालों के खिलाफ जार्जटाउन थाने में बृहस्पतिवार को नामजद एफआईआर दर्ज कराई है। बैंक अधिकारियों ने करीब चार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है।
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 शाखा प्रबंधक नरेंद्र कुमार मिश्र ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2016 से 2018 के बीच यह फर्जीवाड़ा हुआ। शातिरों ने फर्जी तरीके से तैयार नाम एवं पते के आधार पर पर्सनल लोन के लिए बैंक में आवेदन किया। पैसा चुकाने की गारंटी के तौर पर कई सरकारी विभागों से फर्जी सैलरी स्लिप तैयार करके इसके साथ लगाई गई। लोन स्वीकृति से पहले इनके गांरटर भी मांगे गए। सभी ऋणधारकों के लिए दो गारंटर के नाम भी दे दिए गए। औपचारिकताएं पूरी होने पर यह सभी लोन चंद दिनों के भीतर स्वीकृत हो गए। फर्जी नाम पर लोन लेने के बाद कुछ लोन में बैंक को दस हजार से एक लाख रुपये तक लौटाए भी गए, लेकिन जनवरी 18 के बाद किसी भी लोन की किश्त आनी बंद हो गई।

किश्तें न आने पर बैंक ने रिकवरी कार्रवाई शुरू कराई, लेकिन जिस भी पते पर बैंककर्मी जाते सभी फर्जी मिलते। फर्जी पता मिलने पर इन लोगों की सैलरी स्लिप चेक कराई गई, लेकिन वह भी फर्जी मिली। रिकवरी सेल के अधिकारियों ने इसकी शिकायत रायबरेली स्थित मुख्यालय में की। इस पर वरिष्ठ अधिकारियों के कान खड़े हो गए। इसके बाद मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई गई, तब इस तरह एक साथ 61 मामले सामने आ गए।
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दो दिन पहले बैंक अधिकारियों ने एसएसपी से मिलकर इसकी शिकायत की। एसएसपी के आदेश पर जार्जटाउन पुलिस ने कमलेश कसेरा, सुधीर कुमार, सदाशिव पंडित, राजकुमार गौड, ऋषभ चंद्र, सुधीर कुमार, अशोक कुमार, धरम कुमार, विवेक कुमार केसरवानी, अष्टसिद्घ कुमार मिश्रा, अरुण पांडेय, रवि गुप्ता, सोहन लाल, यशराज अग्रवाल, रेशमा अग्रवाल, संजय अग्रवाल, प्रदीप कुमार समेत अन्य केे खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। इंस्पेक्टर निशिकांत प्रधान के मुताबिक बैंक अधिकारियों से रिकार्ड मांगे गए हैं। रिकार्ड देखने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।

फर्जीवाड़ा खुलने के बाद ही बैंक प्रबंधन ने कठोर कदम उठाते हुए उस दौरान स्थानीय शाखा में तैनात प्रबंधक समेत अन्य कर्मचारियों को निलंबित करके उनके खिलाफ जांच शुरू करा दी। हालांकि, बैंक अधिकारी इस मामले में खुलकर बोलना नहीं चाहते, लेकिन उनका भी मानना है कि इतने बड़े फर्जीवाड़े में बैंककर्मियों की मिलीभगत निश्चित तौर पर रही है।

फर्जी तरीके से पर्सनल लोन लेने के लिए जालसाजों ने तमाम सरकारी विभागों की फर्जी सैलरी स्लिप तैयार की। इनमें प्राइमरी एवं माध्यमिक अध्यापक, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर से लेकर लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, रेलवे, ग्राम पंचायत अधिकारी, राजकीय पब्लिक लाइब्रेरी, एजी ऑफिस, शुआटस के लिपिक पद की सैलरी स्लिप बनवाई गई। बैंक ने इन सभी विभागों में जांच कराई जहां इनके फर्जी होने की पुष्टि हुई। 
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