फिलहाल सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा
स्नान करते वक्त डूबने की घटनाएं फिलहाल जिले में सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा हैं। जिसका प्रत्यक्ष सबूत जिला प्रशासन के आंकड़े हैं। मौजूदा साल में अब तक कुल 52 मौतें प्राकृतिक आपदाओं में हुई है। इनमें से 40 मौतें नहाते वक्त नदी-पोखरों में डूबने से हुई। कुल मौतों के हिसाब से पिछले साल भी स्नान के दौरान डूबना जिले में सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा रही थी। पिछले साल कुल 117 मौतों में से 50 लोग ऐसे थे, जिनकी जान डूबने से गई थी।
2.5 महीनों में ही 1.6 करोड़ का मुआवजा तय
प्राकृतिक आपदाओं में मौत के मामले में शासन की ओर से चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है। पिछले वित्तीय वर्ष में 50 लोगों की डूबने से मौत हुई, जिनमें कुल दो करोड़ रुपये का मुआवजा देय हुआ। यह पूरे साल का आंकड़ा था। हालांकि मौजूदा साल में जो हालात हैं, उसमें महज 75 दिनों में ही 40 मौतें हो चुकी हैं यानी शासन की ओर से 1.6 करोड़ का मुआवजा प्रदान किया जाना लगभग तय है।
तीन महीनों में 11 हादसे, 25 मौतें
14 जून- शिवकुटी में आरएएफ जवान समेत चार गंगा में डूबे।
4 जून-संगम पर स्नान के दौरान सात छात्र गंगा में समा गए ।
4 जून-करछना में घाट पर दो चचेरे भाई गंगा में डूबे ।
30 मई- अरैल घाट पर स्नान के दौरान उज्जवल डूब गया।
22 मई- सतना के रहने वाले गोविंद और आदित्य संगम नोज पर डूबे।
20 मई- फाफामऊ घाट पर 12वीं के छात्र कृष्णा और चाहत द्विवेदी डूबे।
18 मई- शिवकुटी में एमएनएनआईटी के दो छात्र गंगा में डूबे
पांच मई- शिवकुटी में कृष्णा व प्रांशू नाम के दो किशोर गंगा में डूबे
पांच अप्रैल- पत्नी की अस्थि विसर्जन को आए मध्य प्रदेश के विवेक दुबे संगम में डूबे
18 मार्च- लखनऊ से आए विजय कुमार राठौर संगम में डूबे
तीन मार्च - इविवि में बीए का छात्र राज सिंह संगम में डूबा