छूटे कर्मचारियों की शिकायत पर विजिलेंस जांच हुई तो रेल अधिकारियों ने नियमित 115 कर्मचारियों के रिकार्ड नष्ट होने का बहाना बनाकर नियमित हुए कर्मचारियों की सूची देने से इन्कार कर दिया। सूचना अधिकार कानून की अनदेखी कर सहयोग करने से भी परहेज किया। लंबे समय तक कार्यरत अनियमित कर्मचारी भुखमरी के कगार पर हैं। रेलवे नियमित हुए कर्मचारियों की जानकारी तक नहीं दे रहा क्योंकि इससे घोटाले का पर्दाफाश हो जाएगा।
कहा गया कि कुछ ऐसे लोग भी नियमित सेवा में लिए गए हैं, जिन्होंने कभी रेलवे की सेवा ही नहीं की थी। याची का कहना है कि नियमित कर्मचारी कहां हैं, रेलवे को पता नहीं है, जबकि 1998 से अब तक रेलवे उन्हें ढाई सौ करोड़ रुपये वेतन दे चुकी है। याची ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज करने की मांग की अर्जी जिला अदालत प्रयागराज में दाखिल की थी। इसके निरस्त होने पर हाईकोर्ट में अपील की गई है।