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ऋषि भारद्वाज की विशाल प्रतिमा का कल राष्ट्रपति करेंगे लोकार्पण, श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण

Wed, 16 Jan 2019 06:18 PM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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Bhardwaj Muni
प्रयागराज के बालसन चौराहे पर ऋषि भारद्वाज की 32 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जा रही है। गुरुवार को संगम नोज से भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इसका लोकार्पण करेंगे। कुंभ आने वाले श्रद्धालुओं को अब यहां भारद्वाज मुनि की विशाल प्रतिमा के भी दर्शन होंगे। बालसन चौराहे पर लम्बे समय से ऋषि भरद्वाज के नाम से पार्क बना हुआ है। मूर्ति की स्थापना पार्क के पास ही की जा रही है। मूर्ति स्थापित होने की वजह से लम्बे समय से खस्ताहाल पड़े पार्क का भी जीर्णोद्धार हो गया है। 
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Bhardwaj Muni
भारद्वाज की इस विशाल मूर्ति को इन्दौर के प्रसिद्ध कलाकार महेंद्र कोडवानी ने बनाया है। कोडवानी ऐसी ही बड़ी मूर्तियों को बनाने में माहिर हैं । मूर्ति का आधार स्टील से बनाया गया है और ऊपरी परत कल्चर्ड मार्बल की है। 32 फीट की इस मूर्ति को 13 फीट की आधारशिला पर स्थापित किया जा रहा है। प्रतिमा स्थापित करने के बाद इस पर कांस्य रंग चढ़ाया गया है। मूर्ति का पूरा खर्च उत्तर प्रदेश सांस्कृतिक विभाग कर रहा है और प्रयागराज विकास प्राधिकरण इसे स्थापित करवा रहा है ।

 

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पीडीए के कार्यकारी इंजीनियर एसडी शर्मा ने बताया कि मूर्ति और पार्क की देखभाल व रखरखाव का भी काम प्रयागराज विकास प्राधिकरण करेगा। बालसन चौराहे पर अब कुल तीन मूर्तियां हो गयी हैं। ऋषि भारद्वाज की इस मूर्ति के पहले ही वहां देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की प्रतिमा लगी हुई है। वहीं दूसरी तरफ पं मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा लगाई गयी है। लेकिन उन दोनों मूर्तियों की अपेक्षा ऋषि भारद्वाज की प्रतिमा बड़ी है ।

 

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Bhardwaj Muni
प्रतिमा का वजन 12 टन है। टुकड़ों में लाई गई इस प्रतिमा को विशाल प्लेटफॉर्म पर जोड़कर विहंगम रूप दिया गया है। महर्षि भारद्वाज की प्रतिमा के अनवारण के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्लेटफॉर्म को महज सात दिन में पक्का करने के लिए मसाले में हार्डनर मिलाया गया है। एक वजह यह भी है कि प्रतिमा का वजन बहुत ज्यादा है।

 

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पीडीए के एक्सईएन एसडी शर्मा ने बताया कि प्लेटफॉर्म की मजबूती के लिए हर उपाय किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रतिमा का डिजाइन खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पसंद किया था। 
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कौन थे ऋषि भारद्वाज
ऋषि भारद्वाज को प्रयाग का प्रथम वासी माना जाता है। अर्थात ऋषि भारद्वाज ने ही प्रयाग को बसाया था। चरक संहिता के अनुसार भरद्वाज ने इन्द्र से आयुर्वेद का ज्ञान पाया। महर्षि भरद्वाज व्याकरण, आयुर्वेद संहित, धनुर्वेद, राजनीतिशास्त्र, यंत्रसर्वस्व, अर्थशास्त्र, पुराण, शिक्षा आदि पर अनेक ग्रंथों के रचयिता हैं। पर आज यंत्र सर्वस्व तथा शिक्षा ही उपलब्ध हैं। वायुपुराण के अनुसार उन्होंने एक पुस्तक आयुर्वेद संहिता लिखी थी, जिसके आठ भाग करके अपने शिष्यों को सिखाया था। चरक संहिता के अनुसार उन्होंने आत्रेय पुनर्वसु को कायचिकित्सा का ज्ञान प्रदान किया था।
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