केपी ट्रस्ट के चुनाव में करीब 27 फीसदी मतदान और त्रिकोणीय संघर्ष ने अध्यक्ष पद के प्रमुख प्रत्याशियों के चेहरों की रंगत उड़ा दी है। प्रत्याशी नए सदस्यों की संख्या में वृद्धि के बाद भी न्यासधारियों के बेरुखी से सकते में हैं। धुरंधर इसे सामान्य बता रहे हैं, जबकि दो-तीन बार से चुनाव मैदान में आए प्रत्याशी इसे अपने प्रचार की ताकत बता रहे हैं।
साफ है कि न्यासधारियों का ट्रस्ट से जुड़ाव कम हो रहा है। इसका कारण माना जा रहा है कि पूर्व अध्यक्षों का अंत समय तक रुख तय नहीं था। इसमें एक तो खुलकर सामने आए जबकि दूसरे जनसंपर्क तक सीमित रहे। प्रयागराज में कायस्थों का संख्या बल ही करीब ढाई लाख है, ऐसे में न्यासधारियों का रुख नई इबारत लिखने का संकेत दे रहा है। बड़ा सवाल चर्चा का विषय बना रहा कि गैर जिलों से तो वोटर आए लेकिन स्थानीय छुट्टी के बाद भी घरों तक सीमित रहे। परिणाम कुछ घंटे बाद सामने आएगा लेकिन कई धुरंधरों को वह और सक्रिय होने का संदेश भी देगा।