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नैनी जेल में अटल की स्मृतियां सहेजने का अब तक नहीं किया प्रयास

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नैनी जेल में कैद अटल की स्मृतियां
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0 देश में इमरजेंसी लगने के पूर्व नैनी जेल में बंद रहे थे पूर्व पीएम अटल बिहारी
0 लखनऊ में आंदोलन केदौरान हुई थी गिरफ्तारी, दर्जनों लोगों के साथ उन्हें भेजा गया था नैनी जेल
0 शासन-प्रशासन ने अभी तक नहीं किया स्मृतियां सहेजने का प्रयास
इलाहाबाद। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृतियों को सजीव बनाए रखने की राज्य सरकार योजना बना रही है। इसके लिए उन स्थानों का चयन किया जा रहा है जहां वे रहे हैं। इसमें बटेश्वर, कानपुर, बलरामपुर, लखनऊ एवं गोरखपुर को शामिल किया जा रहा है। लेकिन राज्य सरकार ने इसमें अटल जी इलाहाबाद की स्मृतियों को तकरीबन भुला दिया है। जबकि देश में आपातकाल लगने से पहले वे नैनी जेल में तकरीबन दो सप्ताह बंद थे। केंद्र एवं राज्य में भाजपा सरकार होने के बावजूद नैनी जेल में उनकी स्मृतियों को सहेजने का अब तक कोई भी प्रयास नहीं किया गया है।
दरअसल देश में आपातकाल लगने से पूर्व अटल बिहारी वाजपेयी ने इंदिरा सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रखा था। तब यूपी सरकार के एक फैसले के विरोध में उन्होंने जनसंघ कार्यकर्ताओं के साथ लखनऊ में विधानसभा के सामने प्रदर्शन किया था। इस दौरान दर्जनों जनसंघ नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के साथ उन्हें गिरफ्तार कर सेंट्रल जेल नैनी भेज दिया था। यहां फरवरी 1975 में वे दर्जनों नेताओं के साथ नैनी जेल में बंद हुए थे। तब नैनी जेल में इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे लक्ष्मी शंकर ओझा भी मीसा बंदी के रूप में बंद थे। उस दौरान वे इलाहाबाद डिग्री कालेज छात्रसंघ के अध्यक्ष थे। उनकी गिरफ्तारी दिसंबर 1974 में हुई थी। यहां अटल जी और लक्ष्मीशंकर ओझा नैनी जेल की सर्किल नंबर पांच में बंद रहे। इस वजह से लक्ष्मीशंकर ओझा का अटल बिहारी वाजपेयी से मेलजोल हो गया। जनसंघ के अन्य नेताओं के साथ वे खाना पीना अटल जी के साथ ही लेते थे। उन स्मृतियों को साझा करते हुए लक्ष्मी शंकर ने बताया कि अटल जी तब तकरीबन दो सप्ताह नैनी जेल में बंद रहे। इस दौरान समाजवादी नेता राजनारायण भी नैनी जेल में बंद थे। वह नेहरू वार्ड में बंद थे। इस दौरान जेल में बंद राजनारायण ने ‘समता और समाजवादी ’ विषय पर संगोष्ी भी करवाई। इस संगोष्ठी में राजनारायण तकरीबन घंटे भर बोले। जब अटल बिहारी जी की बोलने की बारी आई तो उन्होनें एक लाइन में सारा संदेश दे दिया। उन्होंने कहा कि बिना ममता के समता संभव नहीं। उन्होंने कई अन्य संस्मरण भी साझा किए। फिलहाल पूर्व पीएम अटल की इन स्मृतियों को सहेजने की अब तक केंद्र और राज्य सरकार ने कोई भी कवायद नहीं की है। इस बारे में भाजपा नगर अध्यक्ष अवधेश चंद्र से पूछा तो उन्होंने कहा कि सरकार तमाम स्थानों पर उनकी स्मृतियों को सहेजने का काम करने जा रही है। इलाहाबाद की इन स्मृतियों को भी सहेजा जाए इसके लिए राज्य सरकार को पत्र लिखा जाएगा।
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जेल में नियमित रूप से अखबार पढ़ते थे पूर्व पीएम
0 नैनी जेल में 1975 में बंद रहे पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी नियमित रूप से अखबार पढ़ते थे। इस दौरान जेल की लाइब्रेरी से भी पुस्तकें मंगाते थे। कोई किताब अगर उन्हें पसंद आती तो उसके बारे में जनसंघ के नेताओं को विस्तार से बताते थे। तब जेलकर्मी भी उनके बड़े कद और उनकी शालीनता को देखते उनकी काफी इज्जत करते थे।
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