सेना की 540 हेक्टेयर जमीन के लिए हो चुकी है बात
विकास कार्यों के लिए सेना की 540 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी। इसमें बढ़ोतरी संभव है। डीएम का कहना है कि सेना की जमीन लेने के लिए सहमति बन चुकी है। आगे की प्रक्रिया भी चल रही है। इसमें कोई बाधा नहीं है।
प्रमुख परियोजनाएं एवं इनकी स्थिति
- मलाक हरहर से मम्फोर्डगंज तक छह लेन पुल एवं सड़क- पुल का काम अंतिम चरण में है और सड़क के लिए जमीन का अधिग्रहण हो चुका है।
- रिंग रोड - पहले चरण में 29.5 किमी सड़क एवं गंगा पर बनने वाले पुल के लिए 90 फीसदी जमीन का अधिग्रहण हो चुका है।
- संगम से अैरल तक रोपवे- इसके लिए सेना, सिंचाई विभाग की जमीन की जरूरत होगी। सहमति बन गई है।
- सुलेमसराय से झलवा तक सड़क- जमीन की पैमाइश हो चुकी है। जल्द अधिग्रहण होगा।
- झलवा से एयरपोर्ट - 50 फीसदी जमीन का अधिग्रहण कर काश्तकारों को भुगतान किया जा चुका है।
- फाफामऊ में 40 नंबर गुमटी पर रेल उपरिगामी पुल (आरओबी) - जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है।
- सोरांव के गोहरी में आरओबी - जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है।
- फाफामऊ-सहसों-हनुमानगंज में पुल - जमीन की पैमाइश एवं अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है।
- पीडीए की 30 से अधिक सड़कों के लिए जमीन की पैमाइश संग ध्वस्तीकरण के लिए भवन चिह्नित।
- भरद्वाज आश्रम, नागबासुकी, ललिता देवी मंदिर का विस्तार एवं सुंदरीकरण - जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है।
- नागबासुकी से बघाड़ा व अमिताभ बच्चन पुलिया तक इंटरलॉकिंग के लिए जमीन चिह्नित।