विधानसभा चुनाव की तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। बृहस्पतिवार को नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मैदान में अब 181 उम्मीदवार बाकी रह गए हैं, जिनके बीच अंतिम मुकाबला होगा। 23 फरवरी को इनकी किस्मत पर मतदाताओं की मुहर लग जाएगी। नामांकन पत्रों की जांच के बाद 181 प्रत्याशी मैदान में थे, जिनमें से पांच विधानसभा क्षेत्रों के 10 उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिए हैं। नाम वापसी के साथ प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न भी आवंटित कर दिए गए हैं।
विधानसभा चुनाव के चौथे चरण के लिए इलाहाबाद की 12 विधानसभा सीटों से कुल 244 प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किए थे। सात फरवरी को जांच के दौरान इनमें से 53 प्रत्याशियों का नामांकन निरस्त कर दिया गया और बृहस्पतिवार को बाकी रह गए 181 उम्मीदवारों में से दस ने नाम वापसी कर ली। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिटर्निंग अफसरों के दफ्तरों में प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित किए गए। नाम वापसी के बाद सर्वाधिक 26 उम्मीदवार शहर उत्तरी और सबसे कम नौ प्रत्याशी हंडिया विधानसभा क्षेत्र में हैं जबकि शहर दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र में 21, बारा, मेजा एवं करछना में 15-15, सोरांव, फूलपुर और प्रतापपुर में 14-14, शहर पश्चिमी एवं बारा में 13-13, फाफामऊ में 12 उम्मीदवारों के बीच अंतिम मुकाबला होगा।
नाम वापस लेने वाले उम्मीदवार
सोरांव-देवेंद्र कुमार (निर्दलीय)
प्रतापपुर-विमल धर (निर्दलीय)
करछना-अभिमन्यु (जन अधिकार पार्टी), गुलाब सिंह, देव नारायण, मिठाई लाल (निर्दलीय)
शहर उत्तरी-मोहम्मद अली (परिवर्तन समाज पार्टी, शिवदत्त प्रजाशक्ति समदर्शी पार्टी)
बारा-मीनू, सुग्गीलाल (निर्दलीय)
प्रतापपुर में करन को मिला कप-प्लेट
प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र से अपना दल (सोनेलाल) से दो प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किया था। इनमें से एक करन सिंह और दूसरे बृजेंद्र कुमार पांडेय थे। दोनों ने नामांकन पत्र में फॉर्म ए, बी लगा दिया था जबकि अपना दल का चुनाव चिह्न कप-प्लेट किसी एक मिलना था।
बृहस्पतिवार को चुनाव चिह्न आवंटन के दौरान प्रतापपुर के आरओ जल राजन चौधरी ने करन सिंह को अपना दल का चुनाव चिह्न आवंटित किया जबकि बृजेंद्र कुमार पांडेय को ‘बैट’ मिला। बृजेंद्र अब निर्दलीय प्रत्याशी हो गए हैं। आरओ के मुताबिक निर्वाचन प्रतीक (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश 1968 के 13-क के तहत करन सिंह ने पहले नामांकन पहले क्रम संख्या 19 पर था जबकि बृजेंद्र का नामांकन क्रम संख्या 25 पर था। नियम के तहत करन सिंह का नामांकन पहले होने के कारण उन्हें अपना दल (सोनेलाल) का चुनाव चिह्न दिया गया।
हंडिया विधानसभा क्षेत्र में मां-बेटे चुनाव मैदान में आमने-सामने होंगे। यहां से पूर्व मंत्री राकेशधर त्रिपाठी की पत्नी प्रमिला त्रिपाठी ने अपना दल (सोनेलाल) से पर्चा दाखिल किया है जबकि उनके बेटे प्रभात त्रिपाठी ने बतौर निर्दलीय उम्मीदवार नामांकन कराया है। प्रमिला को अपना दल का चुनाव चिह्न मिल गया है। बृहस्पतिवार को उनके बेटे ने नाम वापस नहीं लिया। ऐसे में अब प्रभात भी चुनाव मैदान में हैं। उन्हें चुनाव चिह्न ‘चारपाई’ आवंटित किय गया है।
बतौर निर्दलीय प्रत्याशी पर्चा दाखिल करने वाले इलाहाबाद के पूर्व कमिश्नर बादल चटर्जी को ‘कैंची’ चुनाव चिह्न मिला है। बादल का कहना है कि चुनाव चिह्न के रूप में ‘कैंची’ को प्राथमिकता दी थी और वही चिह्न मिल गया। वह सामाजिक बुराइयों पर कैंची चलाना चाहता हैं।
मतदान के दिन शहर दक्षिणी और शहर पश्चिमी के हर बूथ पर दो-दो ईवीएम का इस्तेमाल किया जाएगा। दरअसल, एक ईवीएम पर प्रत्याशियों के लिए 15 और नोटा का एक बटन होता है। ऐसे में नोट समेत प्रत्याशियों की संख्या 16 से अधिक हुई तो दूसरी ईवीएम का इस्तेमाल किया जाता है। शहर पश्चिमी में 26 और शहर दक्षिणी में 21 प्रत्याशी हैं। ऐसे में दोनों विधानसभा क्षेत्रों में दोगुनी ईवीएम मशीनों को इस्तेमाल किया जाएगा।