प्रयागराज। सांस्कृतिक केंद्र के शिल्प हाट की शाम रागों पर आधारित पारम्परिक भारतीय शास्त्रीय ताल वाद्यों के संग सजी। वादन, सूफी गायन एवं कथक की सुंदर प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विभिन्न लोककलाओें का दर्शकों ने भरपूर आनंद उठाया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत आशुतोष श्रीवास्तव के भजन गायन के साथ हुई। आशुतोष ने गंगा हमकों छोड़ कभी मत इस धरती से जाना, ले... ले.. रे केवट उतराई के दाम-अपने कर की अंगूठी दे रहे राम एवं यशोदानंदन कृष्ण को समर्पित भजन सुनाया। आजमगढ़ के कौशल राय ने ‘चल मनवा गंगा-यमुना तीर, तथा हे गंगा माई-तोहरी पिरितिया महान सुनाकर वाहवाही बटोरी। सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण भारतीय शास्त्रीय एवं ताल वाद्यों का रागों पर आधारित वादन रहा। दिल्ली के अमान व सुहैल के राग यमन, मध्य लय तीन ताल में भगवान शिव को समर्पित वादन से दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। बांसुरी, तबला, हारमोनियम, सितार, सारंगी से युक्त इस प्रस्तुति ने भारतीय ताल वाद्यों की मधुरता रू-ब-रू कराया। राग स्वराज में बनारसी दादरा को बांसुरी, 4 तबलों एवं सारंगी के साथ जिस ढंग से प्रस्तुत किया गया उसकी श्रोताओं ने खास तौर पर वाहवाही की। वाराणसी की सरोज वर्मा ने प्रवासी भारतीयों को समर्पित गीत ‘दूर देश से पाती लेकर सैलानी बादल जो छाये-गंगा तीरे दीप जलाने मित्र प्रवासी भारत आए’ को भी सराहना मिली। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन शांभवी सिंह ने किया।