धान की सिंचाई के लिए इस वर्ष नहरों के टेल तक पानी नहीं पहुंचेगा। ऐसा नहरों में जमा सिल्ट की सफाई न होने के कारण होगा। दरअसल, चालू वित्तीय वर्ष में नहरों की सफाई के लिए बजट ही नहीं मिला है। जिले में 1240 किमी लंबी नहरें हैं, जिसमें सिर्फ 130 किमी ही सिल्ट की सफाई हुई है।
धान की नर्सरी डाल चुके किसानों को रोपाई के लिए अब पानी का इंतजार है। मगर इस वर्ष नहरों के टेल तक पानी नहीं पहुंचेगा। जिले में 1240 मीटर लंबी नहरें हैं, चालू वित्तीय वर्ष में 130 किमी ही नहरों की सफाई हो पाई है। सगरा, हीरागंज माइनर, शारदा सहायक और इलाहाबाद की नहरों में जमा सिल्ट की सफाई ही नहीं हुई है। इससे नहरों में पानी तो आएगा, मगर अंतिम छोर तक पहुंचना मुश्किल होगा। धान की अगेती खेती करने वाले किसान धान रोपाई की तैयारी कर रहे हैं। मगर अभी तक पानी नहीं आने से चिंता बढ़ती जा रही है। दरअसल में सिल्ट की सफाई नहीं होने से टेल तक पानी नहीं पहुंचेगा। नहरों में सिल्ट जमा होने से जहां पटरी टूटने और ओवरफ्लो होने की घटनाएं बढ़ेंगी, वहीं किसानों के धान की फसल प्रभावित हो सकती है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता एसके पाल ने बताया कि शासन ने 130 किमी नहरों के सिल्ट सफाई कराने के लिए ही धन मुहैया कराया था। सवाल यह उठता है कि नहरों में जब सिल्ट जमा रहेगी, तो टेल तक पानी कैसे पहुंचेगा। हालांकि इसका नुकसान किसानों को उठाना पड़ेगा। जब नहरों के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचेगा, तो किसान धान की रोपाई और सिंचाई कैसे करेगा।